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कप्तान काट रहा बाल, बैरिस्टर लगा मजदूरी में

Thu, 07 Feb 2013 10:12 AM IST
मिर्जापुर/अमर उजाला ब्यूरो।
मिर्जापुर/अमर उजाला ब्यूरो। Updated Thu, 07 Feb 2013 10:12 AM IST
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mirzapur special name of people get crazy
रावण ले रहा प्रभु का नाम, कलेक्टर कर रहे मोबाइल का काम और कप्तान कर रहे हैं नाई का काम। हैरान मत होइए, ये तो लोगों के नाम हैं जो कभी उनके मां-बाप ने इस उम्मीद के साथ रखे थे कि बेटा बड़ा अधिकारी बनेगा। वह अलग है कि इन नामों को विरलों ने ही सार्थक किया।
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छानबे ब्लाक के परसिया गांव के कप्तान ने बताया कि वह बचपन में साहसी था। इसके चलते मां ने उसका नाम कप्तान रख दिया। ज्यादा पढ़ नहीं पाने के चलते वह भाई के साथ जिगना बाजार में सैलून में काम करने लगा। जमालपुर ब्लाक के औरैया निवासी दारोगा के पिता चंद्रभूषण यादव ने बताया कि बचपन में बेटा कद काठी से मजबूत था। इच्छा थी कि दारोगा बनेगा, लेकिन ऐसा हो न सका। अब वह खेती कर रहा है। =
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दुगौली के ग्राम प्रधान राष्ट्रपति पांडेय का कहना है कि पड़ोस में एक आदमी को लोग राष्ट्रपति कहकर पुकारते थे। उनके बड़े पिता और बुजुर्गों को यह नाम बहुत अच्छा लगा, तभी से नाम राष्ट्रपति पड़ गया। अब ग्राम प्रधान बन ग्रामीणों की सेवा कर रहे हैं।  
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जमालपुर ब्लाक के सेमरा गांव के बैरिस्टर बचपन में कुशाग्र थे। इसलिए नाम बैरिस्टर रखा गया लेकिन वह पढ़ नहीं सका और अब मजदूरी कर रहा है। सेमरा गांव के मुलायम दाना भूज रहे हैं और लालू यादव पढ़ाई कर रहे हैं। छानबे ब्लाक के बघेड़ा खुर्द निवासी डाक्टर खेती कर रहे हैं। ज

मालपुर के हसौली गांव के कलेक्टर के पिता विजय शंकर द्विवेदी ने बताया कि वाराणसी नगर निगम में नौकरी के दौरान एक सशक्त जिलाधिकारी से प्रभावित होकर अपने बच्चे का नाम कलेक्टर रख दिया। बीएससी करने के बाद अब वह जमालपुर बाजार में मोबाइल की दुकान चला रहा है।


कोन ब्लाक के हुसैनीपुर गांव निवासी रावण का कहना है कि वह बचपन में रामलीला मंचन में रावण की शानदार भूमिका निभाए थे, तभी से परिवार व गांव के लेग उनको रावण के नाम से पुकारने लगे। कोन ब्लाक के पखवैया निवासी दो सगे भाई हनुमान व सुग्रीव का कहना है कि उनका यह नाम उनके दादा जी रखे थे, जिससे घर का वातावरण भक्तिमय बना रहे।
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