सरहदें रोक न सकी, एवरेस्ट लांघकर आ गईं चिड़िया
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सुनहरे पंख...सीटियों की आवाज...रंग बिरंगे पक्षी। एकबार फिर चंडीगढ़ की सुखना लेक का नजारा माइग्रेट्री बर्ड्स ने बदल डाला है। मौसम बदला तो इन पक्षियों ने सरहदें क्रास कर डालीं। कोई आया एवरेस्ट लांघ कर तो कोई अफगानिस्तान और किसी ने क्रास किया चाइना बार्डर। मौसम का लुत्फ लेने के लिए इसमें से कई पक्षी तो रिकार्ड ऊंची उड़ान से सिटी में पहुंचे हैं। अब तक तीन हजार पक्षी सिटी में एंट्री कर चुके हैं और पंद्रह हजार के आने की उम्मीद है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इन प्रवासी पक्षियों के लिए सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और आसपास के इलाकों को शांत करने की व्यवस्था की है। जिससे कि पक्षियों की नेचुरल लाइफ प्रभावित न हो।
सेंट्रल एशिया से आई बार हेडेड गूज की तो बात ही निराली है। एवरेस्ट की चोटियां क्रास करना इसे भली प्रकार से आता है। बार हेडेड गूज की उड़ान का कोई मुकाबला नहीं। ऊंचे झरनों के पास रहना और उड़ान भरना इनकी फितरत में शामिल है। यह माउंट एवरेस्ट (29029 फीट) की ऊंचाई क्रास करके आई है। इसकी खासियत है कि यह 21460 फीट से ऊपर उड़ान भरने में महारथी है। ध्यान बार हेडेड गूज वह है जिसकी मेडिकल साइंस में तब जाना गया जबकि यह एच5एन1 से पीड़ित पाई गई। पक्षियों के जानकारों के अनुसार यह बर्ड कजाकिस्तान से तिब्बत के जरिए इंडिया में आई है। लेसर विसिलिंग डक की सीटियां भी सुखना पर गूंजने लगी है। इनकी संभावना साउथ ईस्ट एशिया और इंडिया के आसपास के देशों नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, सिंगापुर से आने की है। इसके अतिरिक्त सुखना का इलाका प्रवासी पक्षियों यानी ब्राम्ही डक, मलार्ड, कूट और स्पाट बिल्डक से भर गया है। इसमें कामन पोचार्ड भी है। सिटी में यह पक्षी स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। सुखना वन्य जीव अभ्यरण, बाटेनिकल गार्डन में भी यह दिखाई दे रहे हैं।
साइबेरियन क्रेन - लंबी उड़ान, थोड़ा आराम
यह साइबेरियन स्नो क्रेन के नाम से भी जानी जाती है। यह ग्रेडुए फैमिली की क्रेन है। नर बर्फ की तरह सफेद होते हैं और उनके पंख काले, उड़ान के दौरान वे दिखाई देते हैं। सिटी में जो बर्ड्स आई वह वेस्टर्न से हैं। ठंड के मौसम में इरान और इंडिया में ही आती है। इनका स्वभाव लंबी दूरी तय करके रुकने का होता है।
लेसर विसलिंग डक (डेन्ड्रोसाइग्ना जावानिका)
इनको इंडियन विसलिंग डक या लेसर विसलिंग टील भी कहते हैं। यह लेक या फिर धान के खेतों के पास आई जाती हैं। यह अपना घोसला पेड़ के बीच बने होल में बना लेती हैं। यह भूरे रंग की होती हैं और उनके पंख काफी चौड़े हैं।
चिड़ियों के बारे में जानेंगे बच्चे
चंडीगढ़ के उप वन संरक्षक (वन्य जीव) सौरभ कुमार ने बताया कि बच्चों को प्रवासी पक्षियों की जानकारी देने के लिए उनके ट्रिप्स करवाए जा रहे हैं। बच्चों के लिए बाइनाकुलर, स्पाटिंग स्कोप और बर्ड्स से संबंधित पुस्तकों को रखा गया है। जिससे पक्षियों की ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल कर सकें।