फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Bizarre News Archives ›   man lives into a 100-year-old grave after losing his house

कब्र को बनाया घर, यहां पड़ोसी शोर नहीं करता

Fri, 15 Feb 2013 01:36 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Fri, 15 Feb 2013 01:36 PM IST
विज्ञापन
man lives into a 100-year-old grave after losing his house

कहते हैं कि जीते जी आदमी कितने भी बड़े आशियाने में रहे लेकिन मौत के बाद दो गज की कब्र ही नसीब होती है। लेकिन इन जनाब को क्या कहें जो जीते जी पिछले पंद्रह साल से कब्र को अपना आशियाना बनाए बैठे हैं। मंदी में घर क्या बिका, ये जनाब कब्रिस्तान की एक कब्र में रह रहे हैं। इनका कहना है कि जो मजा कब्र में रहने में है वो और कहीं नहीं।

विज्ञापन

home1
विज्ञापन


















यहां बात हो रही है सर्बिया के 43 साल के ब्राटिस्लेव स्टोजेनोविक की। स्टोजेनोविक सर्बिया के निस शहर के कब्रिस्तान में रहते हैं। उनका घर है दो गज लंबी और एक गज गहरी एक कब्र। इस कब्र में स्टोजेनोविक अपने लैंप, मोमबत्तियों और कुछ निजी सामान के साथ आशियाना सजाए बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

home2















स्टोजेनोविक ने पंद्रह साल पहले ये कब्र तब खोजी जब उनके रहने का घर छिन गया। वो एक रात सोने की जगह खोज रहे थे तो 100 साल पुरानी ये कब्र खुली मिली। ये कब्र किसी परिवार की थी जिसकी अब रिकार्ड में कोई जानकारी नहीं है। स्टोजेनोविक ने मृत परिवार को धन्यवाद देते हुए यहां सोना शुरू कर दिया। स्टोजेनोविक को गलियों और चौराहों पर रहने की अपेक्षा यहां रहना काफी आरामदेय लगता है। स्टोजेनोविक के अनुसार ये जगह गर्म और सूखी है। गलियों में गिरती बर्फ और शोर शराबे से अच्छा है कि वहां सोया जाए जहां पड़ोसी शोर नहीं करते।


home4















स्टोजेनोविक के अनुसार शुरूआत में तो उन्हें भी यहां रहने में डर लगता था लेकिन अब आदत हो गई है। अब हालात ये है कि उन्हें मुर्दों से ज्यादा जिंदा लोगों से डर लगता है। 'रात को जब घूमने का दिल करता है तो पहले चैक कर लेता हूं कि आस पास कोई है तो नहीं। कहीं ऐसा न हो कि मुझे टहलता देखकर किसी का दम निकल जाए। '

home3
















स्टोजेनोविक के अनुसार वो रात में कब्र के भीतर मोमबत्ती जलाते हैं। यहां बहुत शांति है। कम से कम पड़ोसी शोर करके परेशान तो नहीं करता। पहले लोग कब्रों पर मोमबत्तियां जला जाया करते थे और स्टोजेनोविक इन्हीं मोमबत्तियों से अपना कब्र बनाम घर रोशन करते थे। लेकिन अब कब्रिस्तान बंद हो चुका है और लोग यहां मोमबत्तियां नहीं जलाते।

स्टोजेनोविक दिन के समय सड़कों पर स्थित डस्टबिन से खाना तलाश करते हैं। वैसे स्थानीय लोग काफी अच्छे हैं जो भोजन और कभी कभी कपड़े भी दे जाते हैं। स्टोजेनोविक को सिगरेट पीने का शौक है। ऐसे में वो रेलवे लाइन के किनारे पड़े सिगरेट के ठूंठों को एकत्र करते हैं और रात में अपने आशियाने में जलाकर पीते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed