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आंख न रही तो दांत से देखने लगा दुनिया

Fri, 28 Jun 2013 04:20 PM IST
नई दिल्ली/ इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/ इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 28 Jun 2013 04:20 PM IST
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 man having a tooth implanted into his eyes

पहली बार में इस कहानी पर आप भरोसा शायद ही कर पाएं लेकिन ये सच है कि दक्षिणी यॉर्कशायर का ये आदमी आंख नहीं बल्कि दांत से देखता है।

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भले ही ये आपको किसी साइंस फिक्शन फिल्म की अस्वभाविक कहानी लगे लेकिन मार्टिन जोन्स के लिए यही सच्चाई है। 12 साल अंधेरे में बिताने वाले मार्टिन के लिए भी ये किसी चमत्कार से कम नहीं है।

डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान मार्टिन का एक दांत उखाड़ा और उसे आंख की जगह फिट करके उस पर लैंस लगा दिया। इसी दांत की बदौलत अब मार्टिन को दिखाई देने लगा है।
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मार्टिन बताते हैं कि 12 साल अंधेरे में बिताने के बाद एक दिन उन्हें पता चला कि वो देख सकते हैं। हालांकि उम्मीद बहुत कम थी।

अमेजिंग एंड वीयर्ड डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, आंखें आने के बाद वो सबसे पहले अपनी बीवी को देखना चाहते थे, जिन्होंने उनके अंधे होने के बावजूद उनसे शादी की।
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दरअसल एक हादसे में मार्टिन के चेहरे पर गर्म एल्युमीनियम गिर गया था। इस हादसे में उनका 37 फीसदी चेहरा बुरी तरह जल गया था। इसके अलावा उन्हें 23 घंटे तक बॉडी स्टॉकिंग पहनकर रहना पड़ता था। इसी हादसे में उनकी बांयी आंख भी निकालनी पड़ गई थी।

हालांकि सर्जन मार्टिन की दांयी आंख बचाने में कामयाब रहे थे लेकिन उस आंख की रौशनी भी चली गई थी। लगभग 10 साल अंधेरे में बिताने के बाद उन्हें ससेक्स आई क्लीनिक में इस सर्जरी के बारे में पता चला।

क्लीनिक के सर्जन क्रिस्टोफर ने मार्टिन का एक जिंदा दांत उखाड़कर उस पर लेंस लगाकर आंख में फिट कर दिया। अमूमन ऐसे मामलों में प्लास्टिक के बेस पर लेंस लगाते हैं लेकिन मार्टिन के केस में ये संभव नहीं था।

सर्जन ने मार्टिन के कैनाइन दांत के एक टुकड़े पर लेंस ट्रांस्प्लांट कर आंख में लगा दिया। आज मार्टिन अपनी बीबी को देख सकते हैं और ये उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है।


कैसे हुई से सर्जरी?

1.दांत को निकालकर उसमें लेंस पकड़ने लायक छेद बनाया जाता है।

2.गाल के भीतरी हिस्से से त्वचा की छिल्ली निकाली जाती है और उसे आंख पर लगा दी जाती है, इसे दो महीने तक रखा जाता है जिसके बाद ये खुद ही आंख का हिस्सा बन जाता है।

3.दांत के हिस्से को फिर आंख पर लगा दिया जाता है और पहले लगाए गए त्वचा के हिस्से से उसको ढक दिया जाता है।

4.सर्जन प्रत्यारोपित किए गए कॉर्निया में छेंद करते हैं ताकी रोशनी अंदर जा सके और मरीज़ देख पाए।

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