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दादा की उम्र में बने पापा, क्या है जवानी का राज

Mon, 11 Feb 2013 12:26 PM IST
बागेश्वर/आनंद नेगी।
बागेश्वर/आनंद नेगी। Updated Mon, 11 Feb 2013 12:26 PM IST
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man became father in age of 73, know his youngness secret
आदमी और बंदर कभी बूढ़ा नहीं होता। इसका जीता जागता उदारहण है जवाहर सिंह मनराल जिसने 63 वें साल में शादी की और 73 वें साल में बेटे के बाप बन गया। शुद्ध घी और शाकाहारी भोजन के साथ साथ ठेठ पहाड़ी जीवनशैली इस जवान की जवानी का राज है। मनराल इस समय दुनिया के खुशकिस्मत लोगों में से एक है जो दादा बनने की उम्र में बाप बना है। दो शादियां कर चुके इस बूढ़े जवान की पहले तीन बेटियां हैं जिनमें से एक की शादी हो चुकी है और वो बाल बच्चों वाली है। हालांकि इससे पहले भारत का ही 96 साल का बुजुर्ग बाप बनकर विश्व रिकार्ड कायम कर चुका है।
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बागेश्वर के कफलखेत गांव के निवासी जवाहर सिंह मनराल 73 साल की उम्र में एक बार फिर पिता बन गए हैं। इस बार उनका बेटा हुआ है। इससे पहले उनकी तीन बेटियां थीं। एक बेटी पहली पत्नी तथा दो बेटियां दूसरी पत्नी से। मनराल ने पहली पत्नी का निधन हो जाने के बाद 63 वर्ष की आयु में मोहनी देवी के साथ दूसरा विवाह किया था, जो विकलांग है।
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मनराल मूल रूप से शीशाखानी गांव के निवासी हैं। वह पीएसी में कुक थे। 1991 में रिटायर होकर आए। उनका पहला विवाह 1963 में हुआ। 2001 में पहली पत्नी की मौत हो गई। इस बीच, वह नगर से सटे कफलखेत में छोटा सा मकान बनाकर यहां रहने लगे। पहली पत्नी से हुई बेटी का विवाह हो चुका था। वर्ष 2003 में उन्होंने विकलांग मोहनी देवी के साथ विवाह कर लिया। इस बीच, मोहनी देवी से उनकी दो बेटियां हुईं। एक बेटी सात साल तो दूसरी तीन साल की है।
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शादी के दस साल बाद अब बुधवार छह फरवरी को 40 वर्षीय मोहनी ने एक पुत्र को जन्म दिया। 73 साल की उम्र में बेटा पाकर मनराल काफी खुश हैं। जवाहर सिंह के भांजे बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन रावल का कहना है कि मनराल की दिनचर्या और जीवन शैली पहाड़ के आम ग्रामीण की तरह ही है। आधुनिकता से वह दूर रहे हैं। शुद्ध भोजन करते हैं और आज भी उनमें जीवटता बरकरार है। भविष्य के प्रति उनका नजरिया हमेशा ही सकारात्मक रहा है।
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