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चिम्पांजी नहीं, अब इन्हें कहा जाए जेंटलमेन
Updated Fri, 06 Dec 2013 12:40 PM IST
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अमरीका में जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक समूह ने न्यूयॉर्क कोर्ट से एक चिम्पांज़ी को क़ानूनी रूप से व्यक्ति का दर्ज़ा देने की मांग की है।
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दि नॉनह्यूमन राइट्स प्रोजक्ट नाम का समूह टॉमी नाम के चिम्पांज़ी को "कानूनन व्यक्ति" का दर्ज़ा दिलाना चाहता है ताकि उसे "अपने शरीर की आज़ादी का मूलभूत अधिकार" हासिल हो सके।
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ये समूह न्यूयॉर्क में इसी हफ़्ते इसी किस्म के केस, तीन और चिंपांज़ियों के लिए भी दायर करने की योजना बना रहा है।
समूह इन चारों को कैद से आज़ाद करवाना चाहता है। उसका कहना है कि इन सभी को उत्तरी अमरीका के वानर अभयारण्य समूह के किसी अभयारण्य में भेजा जाए।
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समूह ने सोमवार को टॉमी की ओर से यह केस दायर किया है।
समूह के संस्थापक स्टीवन वाइज़ ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "हमारा दावा है कि चिम्पांज़ी स्वतंत्र हैं। इसका मतलब है कि वो खुद फ़ैसले कर सकते हैं, अपने बारे में जानते हैं और यह तय कर सकते है कि अपना जीवन कैसे जिएं।"
अपनी याचिका के साथ उन्होंने वैज्ञानिक तथ्य भी पेश किये हैं।
प्रतिबद्ध
वाइज़ ने कहा, "एक बार हम ये साबित कर दें कि चिंपाज़ी स्वतंत्र होते हैं, तो यही उनके क़ानूनी रूप से व्यक्ति का दर्ज़ा हासिल करने के लिए काफ़ी है। कम से कम उन्हें मूलभूत अधिकार तो मिल ही जाएंगे जो मानवाधिकार के तहत मिलते हैं।"
ग्रुप के अनुसार, टॉमी को न्यूयॉर्क के ग्लोवर्सविले में "एक पुराने ट्रेलर रखने के बाड़े में कैद रखा गया है।"
टॉमी के निवास स्थान के मालिक पैट्रिक लावेरी का कहना है कि यह बाड़ा काफ़ी बड़ा है और "इसमें ढ़ेर सारे खिलौने हैं।"
लावेरी ने कहा कि उन्होंने टॉमी को उसके पुराने घर से बचाया था जहां उसके साथ बहुत दुर्व्यवहार किया जाता था लेकिन वह उसे अभयारण्य नहीं भेज पाए क्योंकि वहां जगह नहीं थी।
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उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "अगर उन्होंने (दि नॉनह्यूमन राइट्स ग्रुप) वो जगह देखी होती जहां ये चिंपाज़ी शुरुआती 30 साल तक रहा था तो वह अब उसके रिहाइश को देखकर ख़ुशी से उछलने लगते।"
समूह का कहना है कि वो उन प्राणियों की कानूनी स्थिति बदलने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वतंत्र माने जाते हैं। समूह गोरिल्ला, ओरैंगउटैन, व्हेल, डॉल्फ़िन के साथ ही हाथियों की ओर से भी याचिका दायर कर सकता है।