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ये है 'दक्षिण की दामिनी', 40 दिन तक झेला रेप
तिरुअनंतपुरम।
Updated Wed, 02 Jan 2013 11:04 AM IST
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सारा देश दिल्ली में गैंग रेप की शिकार दामिनी के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है लेकिन केरल में गैंग रेप की शिकार 'दामिनी' को आज तक इंसाफ नहीं मिल पाया है। इस दामिनी की विडंबना ये है कि इसका रेप 42 लोगों ने किया और एक एक करके सभी अदालत से बरी हो गए। पीड़िता जब 16 साल की थी तब 40 दिन में 42 लोगों ने उसका रेप किया था। इस मामले को 'सूर्यानेली रेप केस' के रूप में जाना जाता है। पीड़िता के साथ रेप करने वाले 41 आरोपियों को अदालत बरी कर चुकी है और पी़ड़िता परिवार समेत सामाजिक दंश झेल रही है। परिवार को उम्मीद है कि दामिनी केस में जनता का आंदोलन देखने के बाद इस रेप पीड़ित बच्ची को भी न्याय मिल पाएगा।
पीड़िता के पिता का कहना है कि पड़ोसी उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते। उन्होंने बताया कि हमें कोई स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जब वे हमें देखते हैं तो मुंह फेर लेते हैं। हम घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। पीड़िता को बस कंडक्टर ने अगवा किया था। रेप करने के बाद उसे दूसरे लोगों के हवाले कर दिया। एक.एक कर 42 लोगों ने पीडिता से बलात्कार किया। बलात्कार करने वालों में कई नामी गिरानी लोग शामिल थे। उस समय पीड़िता के पास घर जाने के लिए पैसे नहीं थे। रेप के दौरान पहुंची चोटों के कारण वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।
1999 में इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की गई। 35 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया लेकिन तीन साल बाद हाईकोर्ट ने एक को छोड़कर सभी को बरी कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले की कई लोगों ने आलोचना की। 2005 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन अभी तक मामले में सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। पीडिता का परिवार पेंशन पर निर्भर है। सरकार ने पीड़िता को चपरासी की नौकरी दी थी लेकिन फरवरी में वित्तीय अनियमितता के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और सस्पेंड कर दिया गया।
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पीड़िता के पिता का कहना है कि पड़ोसी उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते। उन्होंने बताया कि हमें कोई स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जब वे हमें देखते हैं तो मुंह फेर लेते हैं। हम घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। पीड़िता को बस कंडक्टर ने अगवा किया था। रेप करने के बाद उसे दूसरे लोगों के हवाले कर दिया। एक.एक कर 42 लोगों ने पीडिता से बलात्कार किया। बलात्कार करने वालों में कई नामी गिरानी लोग शामिल थे। उस समय पीड़िता के पास घर जाने के लिए पैसे नहीं थे। रेप के दौरान पहुंची चोटों के कारण वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।
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1999 में इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की गई। 35 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया लेकिन तीन साल बाद हाईकोर्ट ने एक को छोड़कर सभी को बरी कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले की कई लोगों ने आलोचना की। 2005 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन अभी तक मामले में सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। पीडिता का परिवार पेंशन पर निर्भर है। सरकार ने पीड़िता को चपरासी की नौकरी दी थी लेकिन फरवरी में वित्तीय अनियमितता के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और सस्पेंड कर दिया गया।
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