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सीवर का पानी का नायाब उपयोग, सुनकर दंग रह जाएंगे आप
वेलिंगटन
Updated Thu, 20 Sep 2012 09:28 AM IST
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कुछ साल इंतजार कीजिए जब गटर का पानी आपकी गाड़ी का खुराक मंत्री यानी ईंधन बन जाएगा। अगले 3 सालों में एक ऐसी गाड़ी आने वाली है जिसमें पेट्रोल की जगह सीवेज वेस्ट से तैयार बाय-प्रॉडक्ट को ईंधन की तरह इस्तेमताल किया जाएगा। अगर ये प्रयोग सफल हो गया तो पेट्रोल की बजाय सीवर का पानी ईंधन के पंपों पर मिला करेगा।
जापान की एक कार निर्माता कंपनी ऐसी टीम को स्पॉन्सर कर रही है जो वेस्ट को हाईड्रोजन में बदलने के प्रॉसेस पर रिसर्च कर रहा है। इस टीम की योजना है कि ह्मूमन वेस्ट से हाईड्रोजन बनाई जाए और इस हाइड्रोजन को ईंधन की तरह प्रयोग किया जाए।
जापान के 'निक्की' न्यूजपेपर के अनुसार, फ्यूल सेल (हाइड्रोजन बेस) वाहनों को बिजली से चलने वाले वाहनों से बेहतर माना जाता है क्योंकि वह ज्यादा लंबी दूरी तय कर सकते हैं और कोयले जैसे स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली पर निर्भर नहीं होते।
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इन गाड़ियों में हाइड्रोजन और ऑक्सिजन के बीच केमिकल रिऐक्शन होता है जिससे गाड़ी को चलाने के लिए बिजली पैदा होती है। इन गाड़ियों में से धुएं की जगह पानी बाहर आता है। हालांकि इन गाड़ियों के कर्मशल इस्तेमाल में सबसे बड़ी रुकावट हाइड्रोजन के बनने का प्रोसेस है। इसका पारंपरिक तरीका तो काफी मंहगा और जटिल है। इसमें नेचरल गैस या किसी जीवाश्म से बने ईंधन का इस्तेमाल करना होता है।
वहीं, रिसर्च टीम का कहना है कि वेस्ट से हाइड्रोजन पैदा करना सस्ता तो है ही, साथ ही साथ यह पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। इस प्रोसेस में सीवेज के कीचड़ को सुखा कर उससे मीथेन गैस बनाई जाती है जिसे गर्म कर उसे हाइड्रोजन में तब्दील किया जाता है।
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जापान की एक कार निर्माता कंपनी ऐसी टीम को स्पॉन्सर कर रही है जो वेस्ट को हाईड्रोजन में बदलने के प्रॉसेस पर रिसर्च कर रहा है। इस टीम की योजना है कि ह्मूमन वेस्ट से हाईड्रोजन बनाई जाए और इस हाइड्रोजन को ईंधन की तरह प्रयोग किया जाए।
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जापान के 'निक्की' न्यूजपेपर के अनुसार, फ्यूल सेल (हाइड्रोजन बेस) वाहनों को बिजली से चलने वाले वाहनों से बेहतर माना जाता है क्योंकि वह ज्यादा लंबी दूरी तय कर सकते हैं और कोयले जैसे स्रोतों से पैदा होने वाली बिजली पर निर्भर नहीं होते।
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इन गाड़ियों में हाइड्रोजन और ऑक्सिजन के बीच केमिकल रिऐक्शन होता है जिससे गाड़ी को चलाने के लिए बिजली पैदा होती है। इन गाड़ियों में से धुएं की जगह पानी बाहर आता है। हालांकि इन गाड़ियों के कर्मशल इस्तेमाल में सबसे बड़ी रुकावट हाइड्रोजन के बनने का प्रोसेस है। इसका पारंपरिक तरीका तो काफी मंहगा और जटिल है। इसमें नेचरल गैस या किसी जीवाश्म से बने ईंधन का इस्तेमाल करना होता है।
वहीं, रिसर्च टीम का कहना है कि वेस्ट से हाइड्रोजन पैदा करना सस्ता तो है ही, साथ ही साथ यह पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। इस प्रोसेस में सीवेज के कीचड़ को सुखा कर उससे मीथेन गैस बनाई जाती है जिसे गर्म कर उसे हाइड्रोजन में तब्दील किया जाता है।