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कैसे बिताए सुनीता ने अंतरिक्ष में इतने दिन
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:17 PM IST
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सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ हाल ही में अंतरिक्ष मिशन से सकुशल लौट आई हैं। आखिर अंतरिक्ष स्टेशन पर किस हाल में रहते हैं अंतरिक्ष यात्री। आमतौर पर लोगों में इस बात को लेकर जिज्ञासा रहती है कि अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में कैसे रहते होंगे? क्या खाते होंगे, कहां सोते होंगे, सफाई कैसे करते होंगे और भी बहुत कुछ ऐसे ही कुछ रोचक सवालों के जवाब यहां दिए जा रहे हैं।
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कितनी जरूरी है एक्सरसाइज
धरती पर व्यक्ति के शरीर का निचला भाग और पैर उसका वजन उठाते हैं। इससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती है। अंतरिक्ष में ऐसा नहीं होता, इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों का शरीर हवा में तैरता हुआ दिखता है। वे अपने पैरों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। अंतरिक्ष में शरीर का पिछला हिस्सा मजबूती खोने लगता है। पैरों की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। हड्डियां कमजोर और पतली हो जाती हैं। इस सबसे अंतरिक्षयात्री के शरीर पर बहुत बुरा असर होता है। अब तुम सोचोगे कि अंतरिक्षयात्री अपने शरीर की मजबूती के लिए क्या करते होंगे? तो इसका जवाब है, एक्सरसाइज।
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अंतरिक्षयात्री को फिट और फाइन रहने के लिए हर रोज एक्सरसाइज करनी होती है। इसके लिए वे ट्रेडमिल का इस्तेमाल करते हैं।
और फिर सब हो जाता है उल्टा-पुल्टा
धरती पर हमारे शरीर में रक्त का प्रवाह ऊपर से नीचे की तरफ होता है। लेकिन अंतरिक्ष में गुरुत्वशक्ति न होने से यह प्रवाह नीचे से ऊपर की तरह होने लगता है। रक्त की तरह ही पानी का प्रवाह भी नीचे से ऊपर की तरह होता है। इससे मस्तिष्क को तरल पदार्थों की मात्रा ज्यादा लगने लगती है। इसलिए मस्तिष्क की तरफ से शरीर को यह मात्रा कम करने का निर्देश जाता है। जब अंतरिक्षयात्री धरती पर वापस आते हैं तो उनके शरीर में तरल पदार्थों की पर्याप्त मात्रा नहीं होती है। वापस आने के बाद उनके शरीर को रक्त और पानी की मात्रा पूरी करने में काफी समय लग जाता है। इसके लिए उन्हें कुछ समय अपने शरीर को
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आराम देना होता है। अगर वे पूरा आराम नहीं करते तो उन्हें कमजोरी महसूस हो सकती है।
नहाने के लिए नो पानी
जैसे धरती पर तुम खुद को साफ-सुथरा रखते हो ऐसे ही अंतरिक्ष में भी साफ और स्वच्छ रहने की जरूरत होती है। लेकिन इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अंतरिक्ष में हमारे घरों की तरह बाथरूम भी नहीं होता है। टूथब्रश, टूथपेस्ट, कंघी और शेवर्स जैसे सामान को हाइजिन किट में रखा जाता है। अंतरिक्षयात्री भी तुम्हारी ही तरह टूथपेस्ट और टूथब्रश का इस्तेमाल
करते हैं। मगर अंतरिक्षयान में पानी की निकासी के लिए कोई मोरी या नाली नहीं होती। अंतरिक्षयात्रियों को एक कपड़े पर ही थूकना या कुल्ला करना होता है। नहाने का फंडा भी अंतरिक्ष में अलग होता है।
अतंरिक्षयात्री अलग तरह के साबुन और शैंपू का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के साबुन के लिए पानी की जरूरत नहीं होती। अंतरिक्षयात्री इन्हें बहुत संभाल कर इस्तेमाल करते हैं। इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि साबुन की झाग या बुलबुले फैलने न पाएं। साबुन लगाने के बाद वे लोग पानी डालने की बजाए तौलिये से शरीर साफ करते हैं। इस तरह के साबुन और शैंपू अस्पतालों में ऐसे मरीजों के लिए इस्तेमाल होते हैं, जिन्हें पानी से नहाने की मनाही होती है।
सफाई यानी झाड़पोंछ का झंझट
अंतरिक्षयात्री बहुत छोटी सी जगह पर रहते हैं। वहां दीवारों, फर्श और खिड़कियों को साफ करने के लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है। बर्तन और जरूरत की दूसरी चीजों की सफाई भी गीले कपड़े से पोंछकर की जाती है। कूड़े के लिए अंतरिक्षयान में चार ट्रैशबिन(कूड़ादान) होते हैं। तीन का इस्तेमाल सूखे कूड़े के लिए और एक का गीले वेस्ट के लिए किया जाता है।
ये ट्रैशबिंस प्लास्टिक बैग्स की तरह होते हैं। इन्हें भरते ही बंद कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें एक पाइप से जोड़ दिया जाता है। इससे अंतरिक्षयात्रियों को बदबू नहीं आती। अंतरिक्षयात्रियों को एक वैक्यूम क्लीनर का भी इस्तेमाल करना होता है। वैक्यूम में भी सामान्य तौर पर उपयोग में लाया जाने वाला पाइप ही इस्तेमाल किया जाता है। कुछ चीजें जो गलती से हवा में उड़ने लगती हैं उन्हें पकड़ने के लिए भी वैक्यूम क्लीनर काफी मदद करता है।