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पहाड़ में खो गई रेडियो की आवाज

Tue, 25 Dec 2012 10:38 AM IST
शशिभूषण पुरोहित/धर्मशाला।
शशिभूषण पुरोहित/धर्मशाला। Updated Tue, 25 Dec 2012 10:38 AM IST
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hill area in india has lost of radio trends

करीब डेढ़ दशक पूर्व कुल्लू के एक गांव में भीषण सड़क हादसे में आधा दर्जन से ज्यादा युवाओं की जान चली गई। एक पुलिस कर्मी ने मौके से महिला को फोन लगाया... जी आपका बेटा हादसे में घायल हो गया है, उससे मिलने तुरंत आ जाएं। मां का दिल पसीजा, लेकिन दूसरी ओर से जवाब था कि मुझे बहलाने की कोशिश मत करो अभी-अभी रेडियो पर मैंने बेटे की मौत की खबर सुनी है। बताया जाता है कि हादसे की खबर सुनाने वाली उद्घोषिका हंसा गौतम के पुत्र की भी इसी हादसे में मौत हुई थी।

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कुछ ऐसी विश्वसनीयता के लिए मशहूर रेडियो की क्रेडिविलिटी पर तो कोई आंच नहीं आई है, मगर इसकी लोकप्रियता पहाड़ में भी कम हो गई है। पत्थर की लकीर माने जाने वाली रेडियो की आवाज प्रदेश में कहीं गुम होती दिखाई दे रही है। मीडियम वेव और शॉट वेव के अलावा एफएम पर कई तरह के रोचक कार्यक्रमों की शृंखला के बावजूद रेडियो हिमाचल में भी अंतिम सांसें गिर रहा है।
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वर्ष 2001 में हिमाचल के शहरी इलाकों में 57.4 प्रतिशत लोगों के पास ट्रांजिस्टर था तो 2011 में यह आंकड़ा सिमट कर 28.6 फीसदी तक रह गया। ग्रामीण क्षेत्रों में 46.8 प्रतिशत लोग रेडियो रखते थे, लेकिन 2011 के बाद 25.3 फीसदी लोगों के पास ही रेडियो रह गए। वर्ष 2011 में कराई गई भारत की जनगणना में यह खुलासा हुआ है। शहरी क्षेत्र की बात करें तो चंबा में 18.3, कांगड़ा में 27.3, कुल्लू में 20.9, मंडी में 23.2, हमीरपुर में 31.4, ऊना में 20, बिलासपुर में 25.9, सोलन में 26, सिरमौर में 24 और शिमला में 38.3 फीसदी लोगों के पास ही रेडियो बचा है। निदेशक जनगणना बलवीर तेगटा का कहना है कि इस सर्वेक्षण में लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों को शामिल नहीं किया गया है।   
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दस फीसदी पहाड़ इंटरनेट से जुड़ा
भारत की जनगणना 2011 के आंकड़ों पर गौर करें तो एक चौथाई हिमाचल के पास आज लैपटाप या डेस्क टॉप पीसी मौजूद हैं। इनमें से दस फीसदी लोग सीधे तौर पर इंटरनेट से जुड़े हैं। शहरी इलाकों में मौजूदा दौर में 10.9 प्रतिशत लोग इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि 14.4 प्रतिशत लोगों के पास इंटरनेट नहीं है। इसमें मोबाइल पर इंटरनेट प्रयोग करने वाले लोग शामिल नहीं हैं। 92.5 प्रतिशत लोग टेलीफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें 65.7 प्रतिशत के पास मोबाइल, 5.4 प्रतिशत के पास लैंडलाइन तथा 21.4 प्रतिशत के पास दोनों सेवाएं मौजूद हैं।

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