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यहां स्कूल जाने के लिए लगती है जिंदगी दांव पर

Tue, 19 Feb 2013 10:10 AM IST
हल्द्वानी/भास्कर पोखरियाल।
हल्द्वानी/भास्कर पोखरियाल। Updated Tue, 19 Feb 2013 10:10 AM IST
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haldvani village childrens cross risky damage bridge on river
हर मां अपने जिगर के टुकड़े को स्कूल भेजते हुए प्रार्थना करती हैं कि मेरा बच्चा स्कूल जाकर खूब पढ़ाई करे। लेकिन हल्द्वानी के गाजाबासुली गांव के लोग ऐसा कुछ नहीं सोचते। यहां के लोग अपने नन्हें बच्चों को स्कूल भेजते समय अपने इष्ट देव से यही प्रार्थना करते हैं कि बच्चा सकुशल स्कूल पहुंच जाए और दोपहर को ठीक ठाक लौट आए। क्यों है ऐसा, आइए जानते हैं।
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हल्द्वानी के अमृतपुर में गाजाबासुली सहित आसपास के अन्य गांव के मासूम बच्चे हर रोज मौत और जिंदगी के बीच एक जुआ खेलते हैं। जिंदगी को दांव में लगाने का यह सिलसिला पिछले दो सवा-दो साल से चल रहा है। माता-पिता भी अब अपने जिगर के टुकड़े को अपने ईष्ट देव के सहारे छोड़ देते हैं और दुआ करते हैं हर रोज उनका लाल स्कूल से पढ़कर सकुशल घर लौट आए।
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16 अगस्त 2011 में अमृतपुर डहरा का झूला पुल का एक बड़ा हिस्सा टूट गया और रह गया इसे थामे लोहे की एक बड़ी तार। जनप्रतिनिधियों और सरकार के नुमाइंदों ने भी इसे अभी तक गंभीरता से नहीं लिया। गाजाबासुली गांव के बच्चे झूला पुल के पार से अमिया इंटर कालेज में पढ़ने के लिए आते हैं। सुबह से ही इनकी जिंदगी का हर कदम खतरे की ओर बढ़ता है। अगर सही पड़ा तो बच गई जिंदगी, नहीं तो फिर भगवान ही सहारा है। ऊंचे आसमान और नीचे गहरी नदी और बड़े-बड़े पत्थरों को देखकर इसे मौत के कुएं से भी ज्यादा खतरनाक कहा जाएगा। कक्षा नौ के छात्र चंदप्रकाश के पांव जब टूटे झूलापुल की तारों पर चलकर आगे बढ़ रहे थे तो उसे डर नहीं लग रहा था, वह तो अपने ईष्ट देव का नाम लेकर हर रोज ऐसे ही आगे बढ़ता है।
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सिर्फ चंद्रप्रकाश ही नहीं मनीष, कैलाश आदि दर्जनों छात्र-छात्राओं की ऐसी ही दिनचर्या है। ग्रामीण भैरव दत्त, प्यारे लाल, भूपाल सिंह रावत आदि ने बताया कि कई बार वह क्षेत्रीय विधायक से मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। जिला पंचायत सदस्य संजय शाह ने बताया कि पुल निर्माण के लिए बजट हाल ही में वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने पास कराया।

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