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कोबरा ने 48 बार काटा, फिर भी जीवित हैं ये जनाब
बांदा/इन्टरनेट डेस्क
Updated Wed, 12 Sep 2012 05:54 PM IST
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आप इसे अंध विश्वास कहें या जहरीले कोबरा से अधे़ड उम्र के छंगू लम्बरदार की जन्मजात दुश्मनी, जहरीला कोबरा अब तक उन्हें खदेड़ कर 48 बार काट चुका है, लेकिन हर बार वह मौत के मुंह से बच निकलते हैं। जहरीले सांप के कहर से बचने के लिए वह हर साल नाग पंचमी को नागवंशीय रिवाज से नाग देवता की पूजा-अर्चना करते हैं, फिर भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही।
सपना बन जाता है हकीकत
यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के पनगरा गांव के शिवपुरा मजरे के रहने वाले 48 साल के छंगू लम्बरदार उर्फ सिद्दीक खां की जिंदगी की हकीकत है। जब वह 25 साल के थे, तब से एक जहरीला काला कोबरा उनसे जाती दुश्मनी भुना रहा है। रात में देखा गया सपना, दिन में हकीकत में बदल जाता है और सरेआम नाग उन्हें तमाम लोगों की मौजूदगी में खदेड़ कर काट लेता है।
ताज्जुब की बात यह है कि सांप के जहर का असर किसी अस्पताल या अन्य गांव के ओझा कम नहीं कर पाते, सिर्फ उनके ननिहाल हुसेनपुर गांव का ओझा ही उसे होश में लाता है।
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विष का नहीं होता असर
खासियत यह है कि दूर-दराज के इलाके में सांप काट भी ले तो वह जब तक हुसेनपुर नहीं पहुंच जाता, उन्हें बेहोशी नहीं आती है। कोबरा और छंगू के बीच 23 साल से चली आ रही जंग के पीछे उसका भाई शफीका अंधविश्वास को कारण मानता है। शफीका बताते हैं कि उनके पिता को जमीन में गड़ा धन मिला था।
छंगू ने जिद कर उस धन को खर्च करना चाहा। सांप ने सपने में मना किया, लेकिन वह नहीं माना। तब से यह कोबरा सपने में आने के बाद दिन में उन्हें काट चुका है। ऐसा अब तक 48 बार हो चुका है। वह बताते हैं कि सांप दूर-दराज इलाके में भी काटता है, पर ननिहाल हुसेनपुर पहुंचने तक जहर का उनके भाई पर कोई असर नहीं होता और अस्पताल या अन्य ओझा की झ़ाड-फूंक से ठीक नहीं होते, सिर्फ हुसेनपुर का एक ओझा ही ठीक करता है।
रीति रिवाज भी नहीं आ रहा काम
उन्होंने बताया, 'शंकरगढ़ का सपेरा दिलनाथ दो बार घर से काला नाग पकड़ कर ले जा चुका है, फिर भी राहत नहीं मिली।' वहीं छंगू लम्बरदार के मुताबिक़ अब वह सांप के काटने पर जरा भी भयभीत नहीं होते है, काटने से पूर्व सांप सपने में आता है। वह बताता है कि सपेरों की सलाह पर वह सोने का सांप बनवा कर इलाहाबाद के प्रयागराज संगम में बहा चुके हैं और पिछले पांच साल से पूरे परिवार के साथ पनगरा गांव में सपेरा नासिर खां के घर जाकर नागवंशीय रिवाज से दर्जनों जहरीले सांपों की प्रत्यक्ष पूजा-अर्चना करते हैं, ताकि सांप के कहर से छुटकारा मिल सके, फिर भी छुटकारा नहीं मिल रहा है।
सांप पक़डने में माहिर नासिर का कहना है कि 'सांप बदले की भावना से काटता है। हो सकता है, कभी उसने सांप पर हमला किया हो। इसमें अंधविश्वास जैसी कोई बात नहीं है।'
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सपना बन जाता है हकीकत
यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के पनगरा गांव के शिवपुरा मजरे के रहने वाले 48 साल के छंगू लम्बरदार उर्फ सिद्दीक खां की जिंदगी की हकीकत है। जब वह 25 साल के थे, तब से एक जहरीला काला कोबरा उनसे जाती दुश्मनी भुना रहा है। रात में देखा गया सपना, दिन में हकीकत में बदल जाता है और सरेआम नाग उन्हें तमाम लोगों की मौजूदगी में खदेड़ कर काट लेता है।
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ताज्जुब की बात यह है कि सांप के जहर का असर किसी अस्पताल या अन्य गांव के ओझा कम नहीं कर पाते, सिर्फ उनके ननिहाल हुसेनपुर गांव का ओझा ही उसे होश में लाता है।
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विष का नहीं होता असर
खासियत यह है कि दूर-दराज के इलाके में सांप काट भी ले तो वह जब तक हुसेनपुर नहीं पहुंच जाता, उन्हें बेहोशी नहीं आती है। कोबरा और छंगू के बीच 23 साल से चली आ रही जंग के पीछे उसका भाई शफीका अंधविश्वास को कारण मानता है। शफीका बताते हैं कि उनके पिता को जमीन में गड़ा धन मिला था।
छंगू ने जिद कर उस धन को खर्च करना चाहा। सांप ने सपने में मना किया, लेकिन वह नहीं माना। तब से यह कोबरा सपने में आने के बाद दिन में उन्हें काट चुका है। ऐसा अब तक 48 बार हो चुका है। वह बताते हैं कि सांप दूर-दराज इलाके में भी काटता है, पर ननिहाल हुसेनपुर पहुंचने तक जहर का उनके भाई पर कोई असर नहीं होता और अस्पताल या अन्य ओझा की झ़ाड-फूंक से ठीक नहीं होते, सिर्फ हुसेनपुर का एक ओझा ही ठीक करता है।
रीति रिवाज भी नहीं आ रहा काम
उन्होंने बताया, 'शंकरगढ़ का सपेरा दिलनाथ दो बार घर से काला नाग पकड़ कर ले जा चुका है, फिर भी राहत नहीं मिली।' वहीं छंगू लम्बरदार के मुताबिक़ अब वह सांप के काटने पर जरा भी भयभीत नहीं होते है, काटने से पूर्व सांप सपने में आता है। वह बताता है कि सपेरों की सलाह पर वह सोने का सांप बनवा कर इलाहाबाद के प्रयागराज संगम में बहा चुके हैं और पिछले पांच साल से पूरे परिवार के साथ पनगरा गांव में सपेरा नासिर खां के घर जाकर नागवंशीय रिवाज से दर्जनों जहरीले सांपों की प्रत्यक्ष पूजा-अर्चना करते हैं, ताकि सांप के कहर से छुटकारा मिल सके, फिर भी छुटकारा नहीं मिल रहा है।
सांप पक़डने में माहिर नासिर का कहना है कि 'सांप बदले की भावना से काटता है। हो सकता है, कभी उसने सांप पर हमला किया हो। इसमें अंधविश्वास जैसी कोई बात नहीं है।'