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दो साल पॉलीथीन में रही बंद, फिर भी मिली जिंदा

Tue, 24 Sep 2013 03:47 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 24 Sep 2013 03:47 PM IST
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goldfish survives house fire and two years with no food

जाको राखे साइंया मार सके न कोई, वाली कहावत शायद इसीलिए बनी है। वरना दो साल तक बिना कुछ खाए कोई जिंदा कैसे रह सकता है।

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मेट्रो की खबर के मुताबिक, इस परिवार ने सोचा तो यही था कि उनके तालाब में अब कोई मछली जिंदा नहीं बची होगी। लेकिन दो साल बाद जब घरवालों को ये पता चला कि उनकी मछली जिंदा है तो उनके आश्चर्य का भी ठिकाना नहीं रहा।

इस गोल्ड फिश का नाम स्मोकी है। जिसने 21 महीने एक तालाब में प्लास्टिक शीट के अंदर बिताए। एसेक्स में जब 60 साल की जैकी ब्रोडले कहती हैं कि मछली का जिंदा मिलना काफी उत्साहित करने वाला है।
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ब्रोडले बताती हैं कि उनके पुराने घर के तालाब में एक मछली जिंदा है तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। दरअसल इस घर को छोड़ते समय ब्रोडले ने अपनी सारी मछलियों को एक पॉलीथीन में डालकर तालाब में छोड़ दिया था।
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मछली का जिंदा होना इसलिए ज्यादा आश्चर्य में डालने वाला है क्योंकि मछलियों को पानी में ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा चाहिए होती है। ऐसे में पॉलीथीन में बंद होने के बावजूद स्मोकी का बचा रहना किसी कारनामे से कम नहीं है।

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