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'भगवान, ऐसी पत्नी किसी को न दे...'

Thu, 09 May 2013 12:24 AM IST
नई दिल्ली/धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली/धीरज बेनीवाल Updated Thu, 09 May 2013 12:24 AM IST
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god, do not give anyone such wife

भारतीय संस्कृति में पत्नी सात जन्मों की संगिनी होती है, लेकिन यहां मामला एकदम उलट है। एक पत्नी ने अपने पति से उस समय किनारा कर लिया, जब उसके पति को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

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मामला उत्तरपूर्वी दिल्ली के मौजपुर गांव का है। यहां पत्नी की बेरूखी से परेशान एक पति ने न्याय पाने के लिए अदालत में दस्तक दी है। पति का कहना है कि भगवान ऐसी पत्नी किसी को न दे।
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पत्नी से पीड़ित रामबीर सिंह का नवंबर 2010 में बागपत से लौटते समय एक्सीडेंट हुआ था। चिकित्सा के बावजूद वह ठीक नहीं हुआ और 100 फीसदी लकवाग्रस्त हो गया। चलने फिरने व हर काम के लिए उसे किसी दूसरे की मदद की जरूरत है। इस मुश्किल वक्त में भी उसकी पत्नी सुमन देवी उसके साथ नहीं है।
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एक्सीडेंट के बाद से ही पत्नी ने उसे घर में नहीं घुसने दिया और वह अपने भाई महावीर के घर रहने के लिए मजबूर है। पत्नी ने नाबालिग बच्चों को भी उससे अलग कर दिया है। पति ने आरोप लगाया कि सुमन ने आठ साल के बेटे को एक कमरे में कैद कर रखा है और बेटी को अपने मायके भेज दिया है।

बीमारी से उबरने की उम्मीद खो चुके रामबीर व उसके भाई महावीर ने दोनों बच्चों की कस्टडी दिलाने के लिए अदालत में याचिका दायर की है।

अधिवक्ता डीडी पांडेय ने याचिका में कहा है कि रामबीर के एक्सीडेंट के बाद पत्नी ने उसे घर में घुसने से रोक दिया और उसकी सेवा करना तो दूर, किराए से होने वाली करीब 45 हजार रुपये की आय में से एक पैसा भी पति को नहीं देती जबकि उसकी बीमारी पर भाई महावीर करीब 10 लाख रुपये खर्च कर चुका है।

बच्चों की कस्टडी की मांग करते हुए रामबीर व उसके भाई ने कोर्ट से लोकल कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की है। ताकि यह अधिकारी पड़ोसियों, रामबीर, उसकी पत्नी व बच्चों से बात करके असल हालात जान सके।


याचिका स्वीकार करते हुए कड़कड़डूमा अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुमन, उसकी मां व पिता को समन जारी कर चार जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया है।

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