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'मरने का समय' तय करता है ये चमत्कारी जीन
वाशिंगटन।
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:23 PM IST
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हर आदमी अपना सटीक भविष्य जानना चाहता है। मसलन वो कब शादी करेगा, कब मकान बनेगा। और तो और कुछ लोग तो मरने का समय भी जानना चाहते हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन में एक ऐसी सामान्य विसंगति खोज निकाली है जो यह तय करती है कि आप हर दिन किस समय सोकर उठेंगे और आपकी मौत दिन के किस समय होने की संभावना अधिक है।
शोधकर्ताओं ने जीन में ऐसे परिवर्तन को पहचान लिया है जो दिन में एक ही समय उठने वाले या रातभर जागते रहने वाले लोगों की जनसंख्या को प्रभावित करता है। इस खोज में यह भी पाया गया कि यह परिवर्तन यह भी पता लगा सकता है कि किसी व्यक्ति की मौत दिन के किस समय होने की संभावना अधिक है। इस अध्ययन में मिलने वाले आश्चर्यजनक नतीजों से काम का समय बदलने, चिकित्सीय उपचार की योजना बनाने और नाजुक हालत वाले मरीजों की स्थिति का जायजा लेने का समय तय किया जा सकता है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक एंड्रयू लिम ने कहा कि हमारी आंतरिक जैविक घड़ी मानवीय जीव विज्ञान और व्यवहार के कई पक्षों को नियंत्रित करती है। इनमें सोने का समय, संज्ञान आधारित प्रदर्शन का समय और कई अन्य शारीरिक क्रियाओं का समय शामिल है। यह आघात या दिल के दौरे जैसी कई चिकित्सकीय घटनाओं के समय पर भी अपना प्रभाव डालती है।
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हावर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर सैपर ने एक बयान में कहा है कि आभासी रुप से सभी शारीरिक क्त्रिस्याओं की एक लय होती है। मतलब यह हुआ कि मृत्यु की भी एक लय है। इसीलिए सामान्य जनसंख्या में औसतन लोगों की मृत्यु सुबह के समय होती है। कई बार यह समय औसतन सुबह 11 बजे का रहता है।
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शोधकर्ताओं ने जीन में ऐसे परिवर्तन को पहचान लिया है जो दिन में एक ही समय उठने वाले या रातभर जागते रहने वाले लोगों की जनसंख्या को प्रभावित करता है। इस खोज में यह भी पाया गया कि यह परिवर्तन यह भी पता लगा सकता है कि किसी व्यक्ति की मौत दिन के किस समय होने की संभावना अधिक है। इस अध्ययन में मिलने वाले आश्चर्यजनक नतीजों से काम का समय बदलने, चिकित्सीय उपचार की योजना बनाने और नाजुक हालत वाले मरीजों की स्थिति का जायजा लेने का समय तय किया जा सकता है।
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अध्ययन के प्रमुख लेखक एंड्रयू लिम ने कहा कि हमारी आंतरिक जैविक घड़ी मानवीय जीव विज्ञान और व्यवहार के कई पक्षों को नियंत्रित करती है। इनमें सोने का समय, संज्ञान आधारित प्रदर्शन का समय और कई अन्य शारीरिक क्रियाओं का समय शामिल है। यह आघात या दिल के दौरे जैसी कई चिकित्सकीय घटनाओं के समय पर भी अपना प्रभाव डालती है।
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हावर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर सैपर ने एक बयान में कहा है कि आभासी रुप से सभी शारीरिक क्त्रिस्याओं की एक लय होती है। मतलब यह हुआ कि मृत्यु की भी एक लय है। इसीलिए सामान्य जनसंख्या में औसतन लोगों की मृत्यु सुबह के समय होती है। कई बार यह समय औसतन सुबह 11 बजे का रहता है।