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सुंदर गर्दन पाने के लिए कुछ ऐसा करती हैं ये महिलाएं

Fri, 28 Sep 2012 11:52 AM IST
विनीता वशिष्ठ
विनीता वशिष्ठ Updated Fri, 28 Sep 2012 11:52 AM IST
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for beautuful neck ladies wear rings
मोर जैसी सुंदर गर्दन महिलाओं को और आकर्षक बना देती है। सुंदरता के पैमाने में जितना स्थान पतली कमर का है उतना ही महत्व सुंदर और लंबी गर्दन का है। इसीलिए औरतें मोर जैसी लचकदार सुंदर गर्दन के लिए तरह तरह के प्रयास करती हैं। लेकिन बर्मा और थाइलैंड की पर्वत चोटियों के बीच रहने वाली कायन जनजाति की औरतें सुंदर गर्दन के लिए कुछ ऐसा कर डालती हैं जो शायद हम और आप न कर सकें। यहां औरतें सुंदर गर्दन पाने के लिए अपनी गर्दन में कांस्य के भारी भारी छल्ले पहनती हैं। बचपन से ही बच्चियों के गले में छल्ले डालने शुरू कर दिए जाते हैं। खास बात ये है कि उम्र के साथ साथ गर्दन में छल्लों की संख्या भी बढ़ती जाती है और औरत की गर्दन लंबी और लंबी होती जाती है।
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वैसे तो कायन जनजाति की महिलाओं का विचित्र पहनावा और इनकी सदियों पुरानी मान्यताएं भी लोगों को आकर्षित करती हैं लेकिन ये छल्ले विशेषतौर पर ध्यान खींचते हैं। लगभग सभी कायन महिलाएं अपनी नाजुक गर्दन में भारी-भारी कांस्य के छल्ले पहनती हैं जिनकी संख्या उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है। जब बच्ची पांच वर्ष की होती है तब से यह सिलसिला प्रारंभ होता है और जैसे जैसे उसकी आयु बढ़ती है छल्लों का भार और उनका आकार भी बढ़ता जाता है।
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हालांकि  कायन जाति के जानकारों का कहना है कि इस प्रथा को अपनाने का मुख्य कारण गर्दन की लंबाई को बढ़ाना है जिससे कायन महिलाएं और अधिक सुंदर और आकर्षक लगें। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जिस समय यह प्रथा आरंभ की गई उस समय इसका उद्देश्य महिलाओं को सुंदर बनाना नहीं बल्कि उनको दास-प्रथा से बचाने के लिए भद्दा और बदसूरत प्रदर्शित किया जाना था।
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सदियों पुरानी ये परंपरा उस समय जितनी भी तार्किक हो लेकिन आज के संदर्भ में पीड़ादायक बन चुकी है। एक बार कांस्य के यह छल्ले पहनने के बाद इन्हें उतारना लगभग असंभव है। हालंकि अगर महिलाओँ को चिकित्सीय जांच कराने पर यह छल्ले उतारने की अनुमति है लेकिन ऐसा कम ही हो पाता है कि औरतें इसे उतारने पर राजी हो पाएं। छल्लों का वजन पांच किलो तक होता है और ज्यादा उम्र हो जाने पर इनके बोझ तले बुजुर्ग औरतों की स्थिति दयनीय हो जाती है।
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