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बुरी खबर, धरती से जल्द ही गायब हो जाएंगे मर्द
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Wed, 03 Apr 2013 12:31 PM IST
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अगर आप ये सोच कर बैठे हैं कि मर्दो का जमाना हमेशा ही बना रहेगा तो आप गलत साबित हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की एक विज्ञानी के दावे पर गौर किया जाए तो मर्दो की प्रजाति आने वाले कुछ सालों में लुप्तप्राय हो जाएगी और सबसे बुरी बात ये हैं कि लुप्तप्राय होने की ये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
डेली मेल के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की जानी मानी साइंटिस्ट प्रोफेसर जेनी ग्रेव्स ने दावा किया है कि पुरुष प्रजाति लुप्तप्राय होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जेनी ने ये दावा पुरुष और महिला प्रजाति के क्रोमोजोम की गणना के आधार पर किया है।
जेनी का कहना है कि आश्चर्य की बात ये है कि सेक्स क्रोमोजोम के अस्तित्व की ये लड़ाई महिलाओं के पक्ष में जाएगी। दरअसल पुरुषों में पाया जाने वाला 'वाई' सेक्स क्रोमोजोम यानी गुणसूत्र का आणुवांशिक रूप इतनी तेजी से नष्ट हो रहा है कि आने वाले पचास लाख सालों में वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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जेमी कहती हैं कि पुरुषों के अस्तित्व पर खतरा इसलिए मंडरा रहा है क्योंकि एक तरफ औरतों में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, वहीं परुषों में एक ही वाइ क्रोमोजोम होता है। महिलाओं में एक एक्स क्रोमोजोम दूसरे एक्स क्रोमोजोम से मिलकर शक्तिशाली बनता है।
अफसोस जनक बात ये है कि पुरुषों में ऐसा नहीं हो पाता। पुरुषों में मौजूद वाई क्रोमोजोम दूसरे वाई क्रोमोजोम से जुड़ नहीं पाता और दोनों ही क्रोमोजोम पतन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। यही कारण है कि न जुड़ने के कारण दोनों ही कमजोर रहकर नष्ट हो जाते हैं।
हालांकि कई अन्य वैज्ञानिक जेनी के इस दावे को गलत बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। प्रोफेसर रॉबिन लॉवेल वेड ने पुरुषों के खत्म होने की बात को दरकिनार करते हुए कहा है कि ये दावा बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया लगता है।
रॉबिन सेक्स क्रोमोजोम एक्सपर्ट हैं और उनका कहना है कि हालांकि वाई क्रोमोजोम एक्स की तुलना में कमजोर है लेकिन इसके पतन की प्रक्रिया इतनी जल्द शुरू नहीं हो रही है।
रॉबिन का कहना है कि वाई क्रोमोजोम का पतन एक उम्र में बहुत तेजी से होता है लेकिन एक उम्र और समय सीमा के बाद ये पतन रुक जाता है। इसलिए पुरुषों को घबराने की जरूरत नहीं है।
रॉबिन ने दावा किया कि पिछले 25 लाख सालों से वाई क्रोमोजोम के एक भी जीन का पतन नहीं हुआ है।
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डेली मेल के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की जानी मानी साइंटिस्ट प्रोफेसर जेनी ग्रेव्स ने दावा किया है कि पुरुष प्रजाति लुप्तप्राय होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जेनी ने ये दावा पुरुष और महिला प्रजाति के क्रोमोजोम की गणना के आधार पर किया है।
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जेनी का कहना है कि आश्चर्य की बात ये है कि सेक्स क्रोमोजोम के अस्तित्व की ये लड़ाई महिलाओं के पक्ष में जाएगी। दरअसल पुरुषों में पाया जाने वाला 'वाई' सेक्स क्रोमोजोम यानी गुणसूत्र का आणुवांशिक रूप इतनी तेजी से नष्ट हो रहा है कि आने वाले पचास लाख सालों में वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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जेमी कहती हैं कि पुरुषों के अस्तित्व पर खतरा इसलिए मंडरा रहा है क्योंकि एक तरफ औरतों में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, वहीं परुषों में एक ही वाइ क्रोमोजोम होता है। महिलाओं में एक एक्स क्रोमोजोम दूसरे एक्स क्रोमोजोम से मिलकर शक्तिशाली बनता है।
अफसोस जनक बात ये है कि पुरुषों में ऐसा नहीं हो पाता। पुरुषों में मौजूद वाई क्रोमोजोम दूसरे वाई क्रोमोजोम से जुड़ नहीं पाता और दोनों ही क्रोमोजोम पतन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। यही कारण है कि न जुड़ने के कारण दोनों ही कमजोर रहकर नष्ट हो जाते हैं।
हालांकि कई अन्य वैज्ञानिक जेनी के इस दावे को गलत बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। प्रोफेसर रॉबिन लॉवेल वेड ने पुरुषों के खत्म होने की बात को दरकिनार करते हुए कहा है कि ये दावा बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया लगता है।
रॉबिन सेक्स क्रोमोजोम एक्सपर्ट हैं और उनका कहना है कि हालांकि वाई क्रोमोजोम एक्स की तुलना में कमजोर है लेकिन इसके पतन की प्रक्रिया इतनी जल्द शुरू नहीं हो रही है।
रॉबिन का कहना है कि वाई क्रोमोजोम का पतन एक उम्र में बहुत तेजी से होता है लेकिन एक उम्र और समय सीमा के बाद ये पतन रुक जाता है। इसलिए पुरुषों को घबराने की जरूरत नहीं है।
रॉबिन ने दावा किया कि पिछले 25 लाख सालों से वाई क्रोमोजोम के एक भी जीन का पतन नहीं हुआ है।