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क्या आपको भी चाहिए सप्ताह में दो घंटे ज्यादा
लंदन।
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:42 PM IST
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समय की कमी और करने के लिए ढेर सारे काम। ऐसे में कई ऐसे काम जो आपको पसंद होंगे, आप अगले सप्ताह के लिए छोड़ देते हैं। ऐसे में ये इच्छा प्रबल हो जाती है कि काश....एक सप्ताह में दो घंटे ज्यादा होते ताकि मनमुताबिक काम कर पाते। ये मानसिकता आपकी और हमारी नहीं बल्कि अधिकांश लोगों की होती है।
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एक लोग एक सप्ताह में करीब दो घंटे का वक्त उन चीजों के लिए 'काश...'कहते हुए गुजारते हैं, जिन्हें वह करना चाहते थे लेकिन नहीं कर पाए। अध्ययन के मुताबिक ज्यादातर लोग अपने जीवन में घूमने फिरने नहीं जाने को लेकर अफसोस करते हैं।
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ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अध्ययन के मुताबिक सर्वेक्षण में शामिल आधे लोगों ने माना कि अपने जीवन में किसी न किसी मोड़ पर अपनी इच्छा के खिलाफ जाकर अपना करियर चुना, ऐसी जगह रहने लगे जो उनके सपनों का घर नहीं था और ऐसे किसी व्यक्ति से विवाह कर लिया जिससे वे प्रेम नहीं करते थे। डेली मेल की खबर के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल दो हजार लोगों में से प्रत्येक पांचवीं महिला ने गलत साथी के साथ समय गुजारने पर अफसोस जताया। करीब 10 प्रतिशत पुरुषों ने भी इस बात पर अफसोस जताया।
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सर्वेक्षण में शामिल करीब एक चौथाई लोगों ने माना कि बिना किसी अफसोस के या काश कहे जीवन जीना संभव नहीं है। एक तिहाई से ज्यादा लोगों का कहना है कि धन नहीं होने के कारण वे अपनी इच्छाएं पूरी नहीं कर सके, जबकि 25 प्रतिशत यह सोचते हैं कि प्रेम ने उनके जीवन को पटरी से उतार दिया। अध्ययन में करीब 32 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनमें आत्मविश्वास की कमी होने के कारण वे अपने सपनों और इच्छाओं को पूरी नहीं कर सके और अब उनके लिए काश कहते हैं।