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क्या आपको भी हाथियों के बारे में ऐसा लगता है....
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 13 Sep 2012 03:22 PM IST
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जी हां, हमारी और आपकी तरह हाथी भी आपस में बात करते हैं। लेकिन उनकी बातचीत की फ्रीक्वेंसी इतनी धीमी होती है कि आम आदमी तक वो आवाज पहुंच ही नहीं पाती। पहले ये कहा जाता था कि हाथी बात नहीं करते। लेकिन वैज्ञानिक स्पेक्टोग्राफ की मदद से यह साबित कर रहे हैं कि हाथी भी आपस में बाकायदा बात और मजाक तक करते हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि हाथी बात करने के लिए जिस कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करते हैं, उसे इंफ्रासाउंड कहते हैं। हाथियों की तरफ से मिलने वाला ये सिग्नल मीलों दूर तक जा सकता है। लंबी दूरी पर निकले हाथी इसी सिग्नल को पकड़ कर अपने झुंड तक पहुंच जाते हैं।
लेकिन इस सिग्नल की फ्रीक्वेंसी इतनी धीमी होती है कि बिना स्पेशल इक्युपमेंट का प्रयोग किए आम आदमी इस सिग्नल को कैच नहीं कर सकता। फिलहाल वैज्ञानिक स्पेक्टोग्राफ की मदद से हाथियो के संदेश को सरल भाषा में ट्रांसलेट करने मे जुटे हुए हैं। वो दिन दूर नहीं जब हम भी हाथियों के मजाक सुनकर हंसा करेंगे।
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वैज्ञानिकों ने कहा है कि हाथी बात करने के लिए जिस कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करते हैं, उसे इंफ्रासाउंड कहते हैं। हाथियों की तरफ से मिलने वाला ये सिग्नल मीलों दूर तक जा सकता है। लंबी दूरी पर निकले हाथी इसी सिग्नल को पकड़ कर अपने झुंड तक पहुंच जाते हैं।
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लेकिन इस सिग्नल की फ्रीक्वेंसी इतनी धीमी होती है कि बिना स्पेशल इक्युपमेंट का प्रयोग किए आम आदमी इस सिग्नल को कैच नहीं कर सकता। फिलहाल वैज्ञानिक स्पेक्टोग्राफ की मदद से हाथियो के संदेश को सरल भाषा में ट्रांसलेट करने मे जुटे हुए हैं। वो दिन दूर नहीं जब हम भी हाथियों के मजाक सुनकर हंसा करेंगे।
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