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यहां हर मंदिर के नीचे है जल चुकी है एक चिता
यहां हर मंदिर के नीचे जल चुकी है एक चिता
Updated Tue, 25 Sep 2012 01:50 PM IST
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श्मशान में जाने से हर इंसान डरता है लेकिन श्मशान को देवताओं का
स्थान बना दिया जाए तो वह स्थल पवित्र माना जाने लगता है और लोग भय-मुक्त होकर
देवी-देवताओं के दर्शनों के लिए आते हैं। यही स्थिति आप बिहार राज्य के दरभंगा शहर में स्थित
माधेश्वर परिसर में देख सकते हैं। इस परिसर में कई भव्य और सुंदर मंदिर हैं। इन मंदिरों की
विशेषता यह है कि यहां सभी मंदिर दरभंगा राज परिवार के किसी न किसी सदस्य की चिता
पर बनी हुई है।
चिता पर मंदिर बनाने की परंपरा
चिताओं पर मंदिर बनवाने की परंपरा की शुरूआत राजा माधो सिंह से माना जाता है। इन्हीं के
नाम पर इस परिसर का नाम माधेश्वर परिसर रख गया है। माधव सिंह का निधन वाराणसी में
हुआ था। इनकी अस्थियों को माधेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में रखा गया है। इस स्थान पर
घास का एक चबूतरा है। परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर शव को उसी स्थान पर
रखा जाता है बाद में उसका इसी परिसर में अंतिम संस्कार किया जाता है।
श्यामा काली मंदिर
इस परिसर में सबसे प्रसिद्घ मंदिर है श्यामा मंदिर। काले पत्थर से बनी मां काली की आदम
कद प्रतिमा इस मंदिर में शोभा पाती है। इस मंदिर के नीचे महाराजा रामेश्वर सिंह की
चिता है। इस मंदिर के बायीं ओर पृथ्वी और अन्नपूर्णा माता का मंदिर है जिसके नीचे रामेश्वर
सिंह की पत्नी की चिता है। दरभंगा और आस-पास के क्षेत्रों में मां श्यामा काली के प्रति
लोगों में अटूट श्रद्घा और विश्वास है। लोगों का मानना है कि श्यामा काली सभी की
मनोकामना पूरी करती हैं। लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर माता को चुनरी, साड़ी और
बलि अर्पित करते हैं।
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स्थान बना दिया जाए तो वह स्थल पवित्र माना जाने लगता है और लोग भय-मुक्त होकर
देवी-देवताओं के दर्शनों के लिए आते हैं। यही स्थिति आप बिहार राज्य के दरभंगा शहर में स्थित
माधेश्वर परिसर में देख सकते हैं। इस परिसर में कई भव्य और सुंदर मंदिर हैं। इन मंदिरों की
विशेषता यह है कि यहां सभी मंदिर दरभंगा राज परिवार के किसी न किसी सदस्य की चिता
पर बनी हुई है।
चिता पर मंदिर बनाने की परंपरा
चिताओं पर मंदिर बनवाने की परंपरा की शुरूआत राजा माधो सिंह से माना जाता है। इन्हीं के
नाम पर इस परिसर का नाम माधेश्वर परिसर रख गया है। माधव सिंह का निधन वाराणसी में
हुआ था। इनकी अस्थियों को माधेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में रखा गया है। इस स्थान पर
घास का एक चबूतरा है। परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर शव को उसी स्थान पर
रखा जाता है बाद में उसका इसी परिसर में अंतिम संस्कार किया जाता है।
श्यामा काली मंदिर
इस परिसर में सबसे प्रसिद्घ मंदिर है श्यामा मंदिर। काले पत्थर से बनी मां काली की आदम
कद प्रतिमा इस मंदिर में शोभा पाती है। इस मंदिर के नीचे महाराजा रामेश्वर सिंह की
चिता है। इस मंदिर के बायीं ओर पृथ्वी और अन्नपूर्णा माता का मंदिर है जिसके नीचे रामेश्वर
सिंह की पत्नी की चिता है। दरभंगा और आस-पास के क्षेत्रों में मां श्यामा काली के प्रति
लोगों में अटूट श्रद्घा और विश्वास है। लोगों का मानना है कि श्यामा काली सभी की
मनोकामना पूरी करती हैं। लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर माता को चुनरी, साड़ी और
बलि अर्पित करते हैं।