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रेप करने पर मिली 'नपुंसक' बनाने की सजा

Fri, 04 Jan 2013 10:41 AM IST
सियोल।
सियोल। Updated Fri, 04 Jan 2013 10:41 AM IST
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court orders chemical castration of child rapist

भारत में गैंग रेप की घटना के बाद आरोपी को रसायनिक तत्वों से नपुंसक करने की सजा देने की मांग भले ही जोर शोर से उठ रही हो, लेकिन साउथ कोरिया ने इस दिशा में कदम उठा लिया है। यहां की एक कोर्ट ने पांच लड़कियों का रेप करने वाले आरोपी को रसायनों से नपुंसक करने का आदेश दिया है। एशियाई देशों में साउथ कोरिया ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने बलात्कार के आरोपी को रसायन से नपुंसक करने का आदेश दिया है। इससे पहले जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, पोलैंड और अमेरिका के कलिफोर्निया में ही इस तरह की सजा का प्रवाधान है।

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साउथ कोरिया में वर्ष 2011 में बलात्कार के मामलों के खिलाफ कड़ा कानून बनाया गया था। इस कानून के मुताबिक जो आरोपी बच्चों का यौन शोषण करता है और जो लगातार रेप की वारदातों में शामिल रहता है उसे हार्मोनल उपचार या फिर रसायन के जरिए  नपुंसक करने फैसला लिया गया था। यहां की जिला अदालत ने आरोपी पियो को नवंबर 2011 से मई 2012 तक पांच लड़कियों का बलात्कार करने का आरोपी पाया।
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यहां की न्यूज एजेंसी के मुताबिक यह आरोपी लड़कियों से स्मार्ट फोन चैट सर्विस के दौरान मिला था। आरोपी पियो ने लड़कियों की अश्लील विडियो बना रखी थी और वह उन्हें इन विडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देता था। इतना ही नहीं आरोपी हथियारों के बल पर भी उन्हें धमकाकर पीड़ित लड़कियों बलात्कार करता था। अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपी ने पीड़ित लड़कियों को डरा धमका कर लंबे समय तक कई बार अपराध को अंजाम दिया।
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आरोपी में विकृत यौन जागरूकता और अत्यधिक यौन इच्छा होने के चलते उसमें अपने यौन आवेगों को रोक पाना मुश्किल है। यह कहते हुए अदालत ने आरोपी पियो के 200 घंटों की थेरेपी के जरिए उसे बधिया करने का आदेश दिया है। अदालत ने पियो को दस साल कैद की सजा सुनाई है साथ ही आदेश दिया है कि उसके रिहा होने के बाद उसे एक इलेक्ट्रोनिक मोनेर्टिंग माला पहनाई जाए, जिससे उस पर रिहा होने के बाद बीस सालों तक नजर रखी जा सकी।


भारत में ऐसा करना संभव नहीं
बलात्कार आरोपियों को भले ही कठोर से कठोर सजा देने की मांग उठ रही हो और भारत में ऐसे आरोपियों को रसायनके प्रयोग से  नपुंसक करने की मांग हो रही हो, लेकिन ऐसा यहां कर पाना संभव नहीं है। कई जानकारों का मानना है कि किसी व्यक्ति को रसायनिक रूप से  नपुंसक करना प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने जैसा है। इसके लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन लगाए जाते है जिससे उसके शरीर में शुक्राणु नहीं बनते लेकिन अगर यह इंजेक्शन समय पर नहीं लगाए गए, तो शुक्राणु न बनने की प्रक्रिया फिर शुरू हो जाएगी। इतना ही नहीं यह प्रक्रिया काफी महंगी भी है और कई बार इस प्रक्रिया के कई साइड इफेक्ट भी होते हैं। इसलिए इसे भारत में लागू करने में कई दिक्कतें हो सकती है।

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