{"_id":"4b0f3099d3afb6a8c65a79e641f535c9","slug":"china-abducted-reunited","type":"story","status":"publish","title_hn":"तब के बिछड़े 23 सालों के बाद जाके मिले","category":{"title":"Bizarre News Archives","title_hn":"हटके खबर आर्काइव","slug":"bizarre-news-archives"}}
तब के बिछड़े 23 सालों के बाद जाके मिले
Updated Fri, 13 Dec 2013 11:20 AM IST
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बात 1990 की है। चीन में पांच साल का लुओ गांग अगवा कर लिया जाता है। वह किसी परिवार को बेच दिया जाता है।
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उसे ना तो अपने माता पिता का नाम याद रहता है, ना ही गांव का। घर लौटने की सारी उम्मीदें खो जाती हैं। फिर 23 साल बाद वह अपने घर लौट आता है।
लुओ गांग सचुआन प्रांत के याओजिआ गांव में रहते थे। पिता बिल्डर थे और मां दूकान चलाती थीं। एक छोटा भाई भी था।
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फिर वो दिन उनकी जिंदगी में आया जिसने सब कुछ बदल दिया।
लुओ बताते हैं, "मैं स्कूल जा रहा था। रास्ते में मुझे एक आदमी और औरत मिले। मैं समझा वे पापा के दोस्त हैं इसलिए मैं उनके साथ चला गया।"
उस बच्चे को 1500 किलोमीटर दूर स्थित सेनमिंग ले जाया गया जहां दूसरा परिवार उनका इंतजार कर रहा था।
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चीन में हर साल हजारों बच्चों के अपहरण के मामले सामने आते हैं। इनमें से कुछ ही बच्चे घर लौट पाते हैं। चीन में 'एक बच्चा नीति' और गोद लेने के संबंध में बने कानून के कारण बच्चों की चोरी जैसे अपराध खूब होने लगे हैं।
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साल 2013 के शुरू में फुजियान पुलिस चीफ ने दावा किया था कि साल 2012 में करीब 10,000 बच्चों की तस्करी हुई।
यादों को संजोने लगे
लुओ ने कहा, "मुझे बहुत डर लग रहा था। मगर मैं अगवा किया जा चुका था, मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।" लुओ को पहले पहल यही लगा था कि जिस परिवार ने उन्हें खरीदा है वहां उन्हें ज्यादा दिन नहीं रहना पड़ेगा।
मगर कुछ ही दिनों में उन्हें ये समझ में आ गया कि अब वे अपने माता-पिता से नहीं मिल सकेंगे। उन्हें ये भी पता था कि फिलहाल वे बहुत छोटे हैं।
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इसलिए एक ही रास्ता उन्हें नजर आया। वो ये कि यदि वे अपनी यादों को बचा लेते हैं और बड़े होने तक याद रखते हैं तो माता पिता तक पहुंचने में काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने धुंधली पड़ रही यादों को दोहराना शुरू किया। रोज बिस्तर पर जाते ही अपने पिछले जीवन के वाकयों को याद करने की कोशिश करते।
याद करते कि कैसे वे और उनका छोटा भाई घर के सामने वाले पत्थर के पुल पर खेला करते थे। कैसे एक बार वे पुल से गिर पड़े थे और उन्हें काफी चोट आई थी।
'मैं एक कंप्यूटर था'
वे याद करते कि घर के पास दो नदी बहती थी। कि कैसे धान के खेतों को पार करते हुए स्कूल जाते थे।
लुओ ने बताया, "बस, मैं एक कंम्प्यूटर बन गया था। मैं उसमें अपने परिवार और आस पास के दृश्य की यादों को संजोए रखना चाहता था। मैं उस समय अपना नाम तक नहीं जानता था।"
लुओ के नए माता पिता की दो साल बाद ही मौत हो गई। उन्हें दादा-दादी ने पाला। लुओ कहते हैं कि वे मेरा अच्छी तरह ख्याल रखते थे।
उधर सचुआन में लुओ को जन्म देने वाला परिवार उनके लिए पागल हो रहा था। स्थानीय पुलिस केस सुलझा नहीं पा रही थी। लुओ के पिता डेई जियानफैंग और मां हुआंग किंगयोंग ने पड़ोस के शहरों में भी खोज जारी रखी। उन्होंने अखबारों में भी खबर छपवाई।
साल बीतते गए तो उनके पैसे खत्म होने लगे। बैचेन दंपत्ति ने हार मान ली और एक बच्ची गोद ले ली।
'बेबी कम होम'
इस बीच लुओ का जीवन एकदम बदल गया था मगर उनके भीतर अपने परिवार से मिलने की ललक बढ़ती जा रही थी।
उन्होंने एक सरकारी वेबसाइट में अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। ये वेबसाइट अगवा किए बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाती थी। यहां उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मगर उन्होंने कोशिश नहीं छोड़ी।
अक्टूबर 2012 में लुओ 27 साल के हो चुके थे। उन्होंने 'बेबी कम होम' नाम की एक वेबसाइट पर अपने घर और आस पास की सारी जानकारी डाली।
उन्होंने लिखा, "मैं 110 सेमी लंबा था, बड़ी बड़ी आंखें थीं। मेरे एक हाथ पर कटे का निशान है जो एक नदी में पत्थर से चोट लगने के कारण आया।"
उन्हें गांव का नाम नहीं याद था मगर उन्हें ऐसा लगता था कि वे सचुआन के आस पास ही रहते थे। लुओ ने अपनी वह तस्वीर भी वेबसाइट पर डाली जो उनके दत्तक माता पिता ने खींची थी।
"मेरा घर टाइलों से बना था। तारकोल की नई सड़क थी। बहुत सारे ट्रक उस पर आते जाते थे। शायद वह मुख्य सड़क थी।"
कामयाबी मिलने लगी
बसाइट पर आने वाले लोगों ने तुरंत इन सुरागों पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।
एक ने सुझाव दिया, "1990 में पूर्वी सचुआन के लोग ज्वार नहीं उगाते थे। अगर वहां तारकोल की सड़क थी तो इसका मतलब है कि यह गरीब इलाका नहीं था। यह जरूर कोई उपनगरीय इलाका होगा।"
इसके बाद लुओ ने अपने गांव के उस नक्शो को पोस्ट किया जो उन्होंने अपनी याद से बनाया था। वह पुल। धान के खेत के बीच से स्कूल को जाता रास्ता।
1980 के दशक के भारी बरसात और बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाके खंगाले गए। एक वालंटियर ने अखबारों में उन खबरों को खोजा जो नए सड़क के बनने के बारे में थीं।
मार्च में लुओ को पहली कामयाबी मिली। 1990 साल का गाड़ी के रास्ते का एक नक्शा मिला। इस नक्शे के अनुसार उस समय इस इलाके में केवल गाड़ियों के दो रास्ते थे।
दोंनो परिवार के साथ
लुओ ने उपग्रह नक्शे को जूम किया और गाड़ी के रास्ते का पीछा करने लगे। वालंटियर ने सुझाव दिया कि इस नक्शे में वे उस नदी और उन जगहों को खोजें जहां धान और शकरकंद उगते हों।
इस तरह एक दिन उन्हें नक्शे में अपने स्कूल की इमारत भी मिल गई। वह पुल भी मिला जो 1989 के बाढ़ मे टूट गया था।
"मैं कांप रहा था। मैंने अपनी बहन को बताया। उसने कहा कि मैं दादी और दादा को बिना बताए पहले जाकर उस जगह को देख आऊं।"
"सुबह साढे नौ बजे मैं अपने मां बाप से मिला। मैं शांत था मगर मेरी मां बहुत उत्तेजित थीं, वे रो रही थीं।"
पूरा गांव अपने खोए हुए बेटे को देखने के लिए उमड़ पड़ा था। पटाखे छोड़े जा रहे थे। इसी बीच लुओ के दत्तक दादा दादी टीवी पर यह खबर देख रहे थे। वे बहुत दुखी थे।
लुओ ने फैसला लिया है कि वे अपने दोंनो परिवारों के साथ रहेंगे।