यहां रामलीला करने पर आती है तबाही

राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 18 Oct 2012 02:25 PM IST
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हर साल दशहरे के मौके पर देश भर में रामलीला का आयोजन होता है और रावण को जलाया जाता है। लेकिन नोएडा के पास एक गांव है बिसरख जहां न तो कभी रामलीला होती है और न रावण को जलाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी रामलीला हुई है तब किसी न किसी की मौत हो गयी और रामलीला अधूरी रह गयी। इसलिए लोगों ने रामलीला का आयोजन बंद कर दिया।

बिसरख में ऐसा क्यों होता है
बिसरख में रामलीला करने पर आने वाली आफत के पीछे यह मान्यता है कि यहां रावण ने जन्म लिया था। किंवदंती के अनुसार रावण ने यहां के शिव मंदिर और गाजियाबाद के हिरण्यगर्भ मंदिर एवं दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर में शिव की तपस्या की थी। मंदोदरी से विवाह करने के बाद रावण परिवार सहित लंका चला गया था।

पुराणों में बिसरख का प्राचीन नाम विश्वेश्वरा बताया गया है। जिसके बारे में यह बताया जाता है कि त्रेता युग में प्राकृतिक आपदा के कारण यह गांव पृथ्वी में समा गया। पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा करायी गयी खुदाई में इस गांव से कई शिवलिंग प्राप्त हुए हैं।

यहां प्राप्त होने वाले शिवलिंग अष्ट भुजाओं वाले हैं जो अन्य कहीं पर नहीं हैं। रावण की जन्म स्थली होने की मान्यता के कारण इस गांव के लोग विजया दशमी के दिन जब पूरा देश रावण दहन का जश्न मनाता है ये अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए रावण की पूजा में लगे रहते हैं।

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