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कितना जिएंगे आप जानिए एक ब्लड टेस्ट से
लंदन।
Updated Sat, 29 Dec 2012 10:18 AM IST
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के पास जाते हैं और पूछते हैं कि आप कितने साल तक जिएंगे। पंडित जी के जवाब
से ज्यादा सटीक जवाब आपका ब्लड टेस्ट दे सकता है। ये सच है कि एक टेस्ट से आपकी बची उम्र का अंदाजा हो जाएगा।
शोधकर्ताओं ने एक ऐसा ब्लड टेस्ट ईजाद करने का दावा किया है, जिससे यह पता चल सकेगा कि किसकी जिंदगी कितनी लंबी है। इस ब्लड टेस्ट को ‘लाइफस्पैन’ नाम दिया गया है। इसके माध्यम से लोगों के बूढ़े होने की दर के आधार पर उनके जीवित रहने के सालों का पता लगाया जा सकेगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, खून की जांच से प्रत्येक क्रोमोसोम के किनारे मौजूद सूक्ष्म संरचना टिलोमेरीज की लंबाई मापकर यह पता किया जा सकता है कि लोग किस गति से बूढ़े हो रहे हैं। जब किसी कोशिका का विभाजन होता है तो टिलोमेरीज, क्रोमोसोम को खंडित होने से बचाते हैं। प्रत्येक कोशिका विभाजन के बाद टिलोमेरीज छोटे हो जाते हैं और पशुओं पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि अगर उनकी रक्त कोशिकाओं में छोटे टिलोमेरीज का प्रतिशत अधिक रहता है तो उनकी उम्र सामान्य से कम होती है।
इससे पता चलता है कि ब्लड टेस्ट कर लोगों के जीवित रहने की अवधि के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। इंडिपेंडेंट अखबार में प्रकाशित की रिपोर्ट के अनुसार, सौ से अधिक ब्रिटिश पहले ही यह ब्लड टेस्ट करा चुके हैं, ताकि वे जान सकें कि वे कितनी तेजी से बूढे़ हो रहे हैं और उनकी जिंदगी के कितने साल बचे हैं।
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ब्लड टेस्ट विकसित करने वाली कंपनी को यकीन है कि अगले साल ब्रिटेन में हजारों लोगों का और सदी के अंत तक दुनिया भर के लाखों लोगों का परीक्षण किया जाएगा।
शोधकर्ताओं ने एक ऐसा ब्लड टेस्ट ईजाद करने का दावा किया है, जिससे यह पता चल सकेगा कि किसकी जिंदगी कितनी लंबी है। इस ब्लड टेस्ट को ‘लाइफस्पैन’ नाम दिया गया है। इसके माध्यम से लोगों के बूढ़े होने की दर के आधार पर उनके जीवित रहने के सालों का पता लगाया जा सकेगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार, खून की जांच से प्रत्येक क्रोमोसोम के किनारे मौजूद सूक्ष्म संरचना टिलोमेरीज की लंबाई मापकर यह पता किया जा सकता है कि लोग किस गति से बूढ़े हो रहे हैं। जब किसी कोशिका का विभाजन होता है तो टिलोमेरीज, क्रोमोसोम को खंडित होने से बचाते हैं। प्रत्येक कोशिका विभाजन के बाद टिलोमेरीज छोटे हो जाते हैं और पशुओं पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि अगर उनकी रक्त कोशिकाओं में छोटे टिलोमेरीज का प्रतिशत अधिक रहता है तो उनकी उम्र सामान्य से कम होती है।
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इससे पता चलता है कि ब्लड टेस्ट कर लोगों के जीवित रहने की अवधि के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। इंडिपेंडेंट अखबार में प्रकाशित की रिपोर्ट के अनुसार, सौ से अधिक ब्रिटिश पहले ही यह ब्लड टेस्ट करा चुके हैं, ताकि वे जान सकें कि वे कितनी तेजी से बूढे़ हो रहे हैं और उनकी जिंदगी के कितने साल बचे हैं।
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