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लो कर लो बात, बनने लगे मशीनी इंसान
लंदन।
Updated Sat, 09 Feb 2013 11:35 AM IST
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अभी तक हम क्लोन के बारे में बातें करते थे। लेकिन अब जमाना मशीनी मानव के करीब आ गया है। दरअसल ब्रिटेन में एक ऐसा मानव तैयार किया गया है, जो मनुष्य की वास्तविक प्रकृति के बेहद निकट है। इसकी लागत करीब एक मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब पांच करोड़ रुपये आई है।
दुनिया के पहले बायोनिक मानव का नाम ‘रेक्स’ रखा गया है। इसे 18 कंपनियों और यूनिवर्सिटी की मदद से तैयार किया गया है। यह मशीनीकृत मानव शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संश्लेषित खून, एमआईटी से पैर व टखने, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से रेटिना, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से कृत्रिम गुर्दे, अग्नाशय व प्लीहा तथा स्वांसी से लिए गए कृत्रिम फेफड़े को जोड़कर बनाया गया है । यहां के साइंस म्यूजियम में इसका अनावरण किया गया और इसे 11 मार्च तक इसी स्थान पर रखा जाएगा।
रोबोकॉर्प व फ्रेंकेनस्टीन के मिश्रण साढ़े छह फीट लंबे ‘रेक्स’ का चेहरा आदमी जैसा है और इसकी भूरी आंखें हैं। इस प्रोजेक्ट से जुड़े स्विट्जरलैंड के बर्टोल्ट मेयेर का एक हाथ भी बायोनिक है। इसकी कीमत 30 हजार यूरो है और वे इसे आसानी से घुमाने के साथ पकड़ बना सकते हैं। मेयेर ने कहा कि छह साल पहले तक हम इस मिशन के आस-पास भी नहीं थे। अब हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां एक शानदार व खूबसूरत बॉडी तैयार कर सकते हैं।
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अंगों को बदलने में कर सकता है मदद
‘रेक्स’ के अध्ययन के बाद शरीर के खराब अंगों को बदलने में मदद मिलेगी। इसके अस्तित्व में आने के साथ ही पहली बार उम्मीद जगी है कि मानव द्वारा तैयार किए गए वैकल्पिक अंगों को शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा।
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दुनिया के पहले बायोनिक मानव का नाम ‘रेक्स’ रखा गया है। इसे 18 कंपनियों और यूनिवर्सिटी की मदद से तैयार किया गया है। यह मशीनीकृत मानव शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संश्लेषित खून, एमआईटी से पैर व टखने, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से रेटिना, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से कृत्रिम गुर्दे, अग्नाशय व प्लीहा तथा स्वांसी से लिए गए कृत्रिम फेफड़े को जोड़कर बनाया गया है । यहां के साइंस म्यूजियम में इसका अनावरण किया गया और इसे 11 मार्च तक इसी स्थान पर रखा जाएगा।
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रोबोकॉर्प व फ्रेंकेनस्टीन के मिश्रण साढ़े छह फीट लंबे ‘रेक्स’ का चेहरा आदमी जैसा है और इसकी भूरी आंखें हैं। इस प्रोजेक्ट से जुड़े स्विट्जरलैंड के बर्टोल्ट मेयेर का एक हाथ भी बायोनिक है। इसकी कीमत 30 हजार यूरो है और वे इसे आसानी से घुमाने के साथ पकड़ बना सकते हैं। मेयेर ने कहा कि छह साल पहले तक हम इस मिशन के आस-पास भी नहीं थे। अब हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां एक शानदार व खूबसूरत बॉडी तैयार कर सकते हैं।
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अंगों को बदलने में कर सकता है मदद
‘रेक्स’ के अध्ययन के बाद शरीर के खराब अंगों को बदलने में मदद मिलेगी। इसके अस्तित्व में आने के साथ ही पहली बार उम्मीद जगी है कि मानव द्वारा तैयार किए गए वैकल्पिक अंगों को शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा।