{"_id":"cde4b0d6-0875-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"beatuiful-foot-mean-china-footbinding-crual-ritual","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुंदर पैरों के लिए यहां लड़कियों पर लागू होती थी दर्दनाक परंपरा","category":{"title":"Bizarre News Archives","title_hn":"हटके खबर आर्काइव","slug":"bizarre-news-archives"}}
सुंदर पैरों के लिए यहां लड़कियों पर लागू होती थी दर्दनाक परंपरा
इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 27 Sep 2012 01:04 PM IST
विज्ञापन
सुंदर दिखना हर औरत का सपना होता है। कुछ सुंदर दिखने के लिए शरीर के साथ प्रयोग भी करवाती हैं। लेकिन एक देश ऐसा है जहां सुंदरता के पैमाने पर लाने के लिए लड़कियों के पांवों के साथ दर्दनाक प्रयोग किए जाते रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं चीन की, यहां सुंदर पैरों की परिभाषा को बनाए रखने के लिए कम उम्र की लड़कियों को फुट बाइडिंग नाम की परंपरा का पालन करना पड़ता है। ये परंपरा काफी जटिल और दर्दनाक होती है और इसका पालन करते हुए लड़की के स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ता है। लेकिन इससे बेपरवाह समाज में ये परंपरा चली आ रही है। हालांकि आधुनिक समाज में ये प्रथा लगभग समाप्त हो चुकी है लेकिन फिर पुराने गांवों में ऐसे मामले सुनने को मिल जाते हैं।
चीन में सैंकड़ों सालों से फुटबाइंडिंग नाम की परंपरा है जिसके अंतर्गत बचपन में ही लड़कियों के पैर को इस तरह बांध दिया जाता है ताकि वह ज्यादा ना बढ़ सके। दरअसल चीनी मान्यताओं में महिलाओं के छोटे पैरों को सुंदरता की पहचान समझा जाता था। इसीलिए महिलाओं के पैरों को छोटा बनाए रखने के लिए उनकी फुटबाइंडिंग कर दी जाती थी।
खासतौर पर ये प्रथा बीसवीं शताब्दी तक काफी प्रचलित रही। इसके तहत घर की बड़ी महिलाएं छह साल से छोटी उम्र की बच्ची की फुटबाइंडिंग कर देती थी। फुटबाइंडिंग के कारण कभी भी उस बच्ची के पैर 4-5 इंच से ज्यादा नहीं बढ़ पाते थे क्योंकि पैरों का विकास नही हो पाता था। कई बार ऐसा लंबे समय तकहोने के कारण कई औरतें पैरों में जख्म और अपंगता का शिकार बन गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
चीन में सैंकड़ों सालों से फुटबाइंडिंग नाम की परंपरा है जिसके अंतर्गत बचपन में ही लड़कियों के पैर को इस तरह बांध दिया जाता है ताकि वह ज्यादा ना बढ़ सके। दरअसल चीनी मान्यताओं में महिलाओं के छोटे पैरों को सुंदरता की पहचान समझा जाता था। इसीलिए महिलाओं के पैरों को छोटा बनाए रखने के लिए उनकी फुटबाइंडिंग कर दी जाती थी।
विज्ञापन
खासतौर पर ये प्रथा बीसवीं शताब्दी तक काफी प्रचलित रही। इसके तहत घर की बड़ी महिलाएं छह साल से छोटी उम्र की बच्ची की फुटबाइंडिंग कर देती थी। फुटबाइंडिंग के कारण कभी भी उस बच्ची के पैर 4-5 इंच से ज्यादा नहीं बढ़ पाते थे क्योंकि पैरों का विकास नही हो पाता था। कई बार ऐसा लंबे समय तकहोने के कारण कई औरतें पैरों में जख्म और अपंगता का शिकार बन गई।
विज्ञापन