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पार्टनर के संग चलो चांद की सैर पर
वाशिंगटन।
Updated Sat, 08 Dec 2012 11:35 AM IST
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अभी तक आप ने चांद पर सैर के सपने ही देखें होंगे लेकिन अब ये सपने पूरे होने वाले हैं। अमेरिका की एक कंपनी आपके इस सपने को पूरा करने का जिम्मा उठाया है। नासा के कुछ पूर्व अधिकारियों ने ‘गोल्डन स्पाइक’ नाम की कंपनी तैयार की है जो लोगों को चांद की यात्रा करवाएगी। यह कंपनी 14 अरब रुपए में दो लोगों को चांद की यात्रा पर ले जाएगी।
गोल्डन स्पाइक कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वे लोगों को चांद पर भेजने के लिए पहले से ही मौजूद राकेट और कैप्सूल तकनीक का इस्तेमाल करेगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत 2020 तक होने की उम्मीद है। कुछ साल पहले एक ‘स्पेस एक्स’ नाम की कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कुछ सामान पहुंचाया था जिसके बाद दूसरी कंपनियों को चांद की यात्रा पर ले जाने का विचार आया।
हालांकि बहुत अधिक कीमत और लोगों की कम होती दिलचस्पी ने चंद्रमा से जुड़े कार्यक्रमों को बंद करने पर मजबूर किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नासा के एक कार्यक्रम को ये कहते हुए बंद कर दिया कि अमेरिका वहां पहले जा चुका है। अमेरिका चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला मुल्क था।
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नासा के पूर्व सह प्रशासक एलेन स्टर्न का कहना है कि गोल्डन स्पाइक दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी कोरिया और जापान जैसे देशों की सरकारों से यात्राओं को लेकर बातचीत कर रही है क्योंकि उन्हें चांद पर वैज्ञानिक परीक्षण वगैरह करने में दिलचस्पी हो सकती है। वे कहते हैं कि नासा ने जो कुछ 1960 के दशक में किया था। कंपनी उसे व्यवसाय में तबदील करने जा रही है। कंपनी का कहना है कि वो साल में 15 से 20 यात्राएं चांद पर भेजेंगे।
हालांकि हवार्ड विश्वविद्यालय में काम करने वाले खगोल वैज्ञानिक जोनाथन मैक्डवेल ने कहा है कि गोल्डन स्पाइक जैसी कई कंपनियां शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएंगी। कंपनी के यात्रा की भारी कीमत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसके बहुत आगे तक जाने की उम्मीद नहीं है।
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गोल्डन स्पाइक कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वे लोगों को चांद पर भेजने के लिए पहले से ही मौजूद राकेट और कैप्सूल तकनीक का इस्तेमाल करेगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत 2020 तक होने की उम्मीद है। कुछ साल पहले एक ‘स्पेस एक्स’ नाम की कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कुछ सामान पहुंचाया था जिसके बाद दूसरी कंपनियों को चांद की यात्रा पर ले जाने का विचार आया।
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हालांकि बहुत अधिक कीमत और लोगों की कम होती दिलचस्पी ने चंद्रमा से जुड़े कार्यक्रमों को बंद करने पर मजबूर किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नासा के एक कार्यक्रम को ये कहते हुए बंद कर दिया कि अमेरिका वहां पहले जा चुका है। अमेरिका चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला मुल्क था।
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नासा के पूर्व सह प्रशासक एलेन स्टर्न का कहना है कि गोल्डन स्पाइक दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी कोरिया और जापान जैसे देशों की सरकारों से यात्राओं को लेकर बातचीत कर रही है क्योंकि उन्हें चांद पर वैज्ञानिक परीक्षण वगैरह करने में दिलचस्पी हो सकती है। वे कहते हैं कि नासा ने जो कुछ 1960 के दशक में किया था। कंपनी उसे व्यवसाय में तबदील करने जा रही है। कंपनी का कहना है कि वो साल में 15 से 20 यात्राएं चांद पर भेजेंगे।
हालांकि हवार्ड विश्वविद्यालय में काम करने वाले खगोल वैज्ञानिक जोनाथन मैक्डवेल ने कहा है कि गोल्डन स्पाइक जैसी कई कंपनियां शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएंगी। कंपनी के यात्रा की भारी कीमत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसके बहुत आगे तक जाने की उम्मीद नहीं है।