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मुख्य स्नान पर्वों पर मेले में न जायें वाहन : हाईकोर्ट

Fri, 15 Feb 2013 03:19 PM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
इलाहाबाद/ब्यूरो Updated Fri, 15 Feb 2013 03:19 PM IST
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vehicles should not allowed on main snan in kumbh

हाईकोर्ट ने कुंभ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दिन भी चार पहिया वाहनों को प्रवेश की अनुमति देने पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब किसी भी प्रमुख स्नान पर्व पर मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश की अनुमति न दी जाए। कोर्ट ने सिर्फ पुलिस की गाड़ियों और एंबुलेंस को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा है।

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गंगा प्रदूषण याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अरुण टंडन की खंडपीठ ने रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के मामले में यह कहते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया कि यह एक भिन्न मामला है और संबंधित विभाग अपनी जांच कर रहा है।
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कोर्ट ने मेला प्रशासन को यह भी आदेश दिया है कि स्नान पर्वों के बाद घाटों पर फेंके गए जूते-चप्पल और फूल आदि को फौरन वहां से हटाया जाए ताकि वह गंगा को प्रदूषित न कर सके। कोर्ट ने कहा कि बहुत से लोगों ने घाट पर चप्पलें जानबूझकर छोड़ दी थीं।
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एमिकस क्यूरी अरुण गुप्ता ने हादसे के बाबत कोर्ट को अवगत कराया कि कुछ लोगों के चार पहिया वाहनों को मौनी अमावस्या पर प्रवेश की अनुमति दी गई थी। इसके चलते सेक्टर 12 और काली सड़क पर भी भगदड़ हुई थी। न्यायालय ने रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के पास चौबीसों घंटे चलने वाला मेडिकल कैंप स्थापित करने और एंबुलेंस खड़ी रखने का निर्देश दिया है।

एमिकस क्यूरी ने कुंभ मेला के लिए अथॉरिटी बनाने का सुझाव दिया जिस पर कोर्ट का कहना था कि मेले की व्यवस्था सफलता पूर्वक की गई और व्यवस्था कर रहे लोगों ने बेहतर प्रबंध किए हैं। एमिकस क्यूरी ने कहा कि गंगा में पर्याप्त मात्रा में जल न छोड़े जाने की वजह से स्नान पर्वों पर पानी का रंग लाल था। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वह जांच कर बताए कि स्नान पर्वों पर कैसे पानी लाल हो गया। बोर्ड ने जल की गुणवत्ता पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।


बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में गंगा जल का बीओडी स्तर 15 के आसपास है। एसटीपी से शोधित जल गंगा में छोड़े जाने पर कोर्ट ने कहा कि एसटीपी क्षमता के अनुसार शोधित जल का बीओडी स्तर 40-50 मिलीलीटर प्रति लीटर होता है जबकि स्नान योग्य अनुमन्य स्तर 3.0 है। इसलिए ट्रीटमेंट प्लाटों का पानी गंगा में न छोड़ा जाए। प्लाटों के शोधित पानी को कहीं और इस्तेमाल पर रिपोर्ट भी मांगी है।

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