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संगम का हर घाट कुछ कहता है...
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jan 2013 04:02 PM IST
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संगम के निकट एक घाट है, जिसके लिए मान्यता प्रचलित है कि वहां भगवान राम ने स्नान किया था। इसलिए उस जगह का नाम रामघाट रखा गया। दारागंज के घाट में दशाश्वमेघ यज्ञ हुआ था और उस घाट का नाम दशाश्वमेघ घाट रखा गया। इसी तरह हर घाट के पीछे कोई न कोई कहानी या मान्यता प्रचलित है। कुंभ मेला क्षेत्र में हर घाट का अपना-अपना महत्व भी है। कोई घाट स्नान, कोई पूजापाठ तो कोई घाट आरती के लिए निर्धारित है।
गंगा स्नान के लिए सबसे महत्वपूर्ण संगम घाट माना जाता है, क्योंकि इसी जगह पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन हुआ है। कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों पर सबसे ज्यादा भीड़ इसी घाट पर होनी है। संगम पर ही तीर्थों के राजा भगवान वेणी माधव का आसन भी है। इसलिए वहां दान-दक्षिणा देने और पूजा-पाठ का भी प्रचलन है।
रामघाट पर स्नान के साथ गंगा आरती के लिए भी भीड़ लगी है। वहां साल भर आरती होती है। दशाश्वमेघ घाट पर जल चढ़ाने की प्रथा भी है तो नागवासुकि घाट पर स्नानार्थियों की भीड़ इसलिए ज्यादा लगती है, क्योंकि भगवान नागवासुकि के स्नान किए जाने की मान्यता प्राचलित है। घाट के पास ही नागवासुकि का प्राचीन मंदिर भी है।
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यमुना किनारे स्थित बरगद घाट, गऊघाट, बोट क्लब घाट, सरस्वती घाट, अरैल घाट पर भी स्नानार्थियों की भीड़ लगती है लेकिन यह भीड़ कार्तिक के महीने में ज्यादा होती है। इन घाटों पर कार्तिक के महीने में ही स्नान की प्रथा है। यमुना किनारे इन घाटों पर भी साल भर आरती के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। कुंभ या अर्धकुंभ में यमुना किनारे स्थित घाटों के बजाय श्रद्धालु संगम घाट, रामघाट, नागवासुकि घाट या दशाश्वमेघ घाट की तरफ ही जाना चाहते हैं।
प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ को संभालना चुनौती
मेला प्रशासन का अनुमान है कि कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ इकट्ठा होगी। मौनी अमावस्या पर तो संभावित भीड़ करोड़ों में है। इसी वजह से मेला क्षेत्र में तीन दर्जन से ज्यादा नए अस्थायी घाट तैयार किए जा रहे हैं। प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ को संतुलित करते हुए अन्य अस्थायी स्नानघाटों की तरफ किस तरह मोड़ा जाए, पुलिस के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती भी होगी।
मेला की व्यवस्था से जुड़े अफसरों के मुताबिक हर कोई संगम, दशाश्वमेघ, नागवासुकि या रामघाट पर स्नान करना चाहेगा जबकि पुलिस की कोशिश होगी कि भीड़ को डायवर्ट कर हर घाट की तरफ भेजा जाए।
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गंगा स्नान के लिए सबसे महत्वपूर्ण संगम घाट माना जाता है, क्योंकि इसी जगह पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन हुआ है। कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों पर सबसे ज्यादा भीड़ इसी घाट पर होनी है। संगम पर ही तीर्थों के राजा भगवान वेणी माधव का आसन भी है। इसलिए वहां दान-दक्षिणा देने और पूजा-पाठ का भी प्रचलन है।
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रामघाट पर स्नान के साथ गंगा आरती के लिए भी भीड़ लगी है। वहां साल भर आरती होती है। दशाश्वमेघ घाट पर जल चढ़ाने की प्रथा भी है तो नागवासुकि घाट पर स्नानार्थियों की भीड़ इसलिए ज्यादा लगती है, क्योंकि भगवान नागवासुकि के स्नान किए जाने की मान्यता प्राचलित है। घाट के पास ही नागवासुकि का प्राचीन मंदिर भी है।
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यमुना किनारे स्थित बरगद घाट, गऊघाट, बोट क्लब घाट, सरस्वती घाट, अरैल घाट पर भी स्नानार्थियों की भीड़ लगती है लेकिन यह भीड़ कार्तिक के महीने में ज्यादा होती है। इन घाटों पर कार्तिक के महीने में ही स्नान की प्रथा है। यमुना किनारे इन घाटों पर भी साल भर आरती के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। कुंभ या अर्धकुंभ में यमुना किनारे स्थित घाटों के बजाय श्रद्धालु संगम घाट, रामघाट, नागवासुकि घाट या दशाश्वमेघ घाट की तरफ ही जाना चाहते हैं।
प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ को संभालना चुनौती
मेला प्रशासन का अनुमान है कि कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ इकट्ठा होगी। मौनी अमावस्या पर तो संभावित भीड़ करोड़ों में है। इसी वजह से मेला क्षेत्र में तीन दर्जन से ज्यादा नए अस्थायी घाट तैयार किए जा रहे हैं। प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ को संतुलित करते हुए अन्य अस्थायी स्नानघाटों की तरफ किस तरह मोड़ा जाए, पुलिस के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती भी होगी।
मेला की व्यवस्था से जुड़े अफसरों के मुताबिक हर कोई संगम, दशाश्वमेघ, नागवासुकि या रामघाट पर स्नान करना चाहेगा जबकि पुलिस की कोशिश होगी कि भीड़ को डायवर्ट कर हर घाट की तरफ भेजा जाए।