{"_id":"e6b09b20-6577-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"tapan-shri-mahant-bharti-are-standing-by-33-years","type":"story","status":"publish","title_hn":"33 साल से खड़े ही हैं श्रीमहंत तपन भारती","category":{"title":"Astrology Archives","title_hn":"ज्योतिष आर्काइव","slug":"astrology-archives"}}
33 साल से खड़े ही हैं श्रीमहंत तपन भारती
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jan 2013 09:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुंभ में भाइयों के बिछुड़ने की कहानी तो बहुत सुनी होगी लेकिन इस कुंभ में एक हठयोगी बीस साल बाद अपने भाइयों से मिलेंगे। बचपन में ही घर-बार त्याग चुके हठयोगी 33 साल से खड़े हुए हैं।
विज्ञापन
खड़े हुए सोते और खाते-पीते भी हैं। इससे पहले 31 साल तक मौन रहे। अन्न अब भी ग्रहण नहीं करते, सिर्फ फलाहारी हैं। खड़े-खड़े पैर में घाव हो गया है। डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी है पर योगी के हठ के आगे डॉक्टरों की भी नहीं चली।
विज्ञापन
तपोनिधि आनंद अखाड़े के श्रीमहंत तपन भारती 65 साल के हैं। वह बंगाल से आए हैं। बचपन में मां से प्रेरणा पाकर वह संन्यासी बन गए और घर-बार त्याग दिया। अखाड़े के संत उन्हें सिद्ध पुरुष बताते हैं।
विज्ञापन
वैसे तो पूरे मेला क्षेत्र में ऐसे तमाम संत दिख जाएंगे, जो कई साल से पैर पर खड़े हैं या अपने हाथ उठाए हुए हैं लेकिन श्री महंत तपन भारती कुछ अलग हैं। वह अखाड़े के भीतर छोटे से एक शिविर में रहते हैं। सबके सामने नहीं आते। खड़े होकर विश्राम करने या सोने के लिए लकड़ी का एक ऐंगल बनवा रखा है। उसी पर अपने दोनों हाथ टिकाकर सो जाते हैं।
श्रीमहंत बताते हैं कि वे सात भाई है, जिनमें वह तीसरे नंबर के हैं। बीस साल से भाइयों से नहीं मिले हैं। उनके कुछ भाई नौकरी करते हैं तो कुछ का अपना व्यवसाय है। उनके पास संदेश आया है कि इनमें से दो भाई कुंभ मेले में आ रहे हैं। श्रीमहंत 20 साल बाद अपने भाइयों से मिलेंगे।