फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Astrology Archives ›   story of dog bhakti

जानिए, मंदिर की परिक्रमा करने वाले कुत्ते का सच

Fri, 08 May 2015 08:55 AM IST
Updated Fri, 08 May 2015 08:55 AM IST
विज्ञापन
story of dog bhakti

झांसी में पिछले 45 घंटों से एक अजब सी खबर आग की तरह फैलती चली जा रही है जिसकी चर्चा और देश के दूसरे भागों में भी होने लगी है। मामला है एक कुत्ते का जो यूं तो काफी लंबे समय से इस मंदिर के आस-पास रहता था। लेकिन बीते 45 घंटों से इस कुत्ते में अजब से बदलाव आया है।

विज्ञापन


स्थानीय लोग ऐसा कह रहे हैं कि इस कुत्ते में ईश्वर के प्रति भक्ति जग उठी है और यह लगातर शिवलिंग की परिक्रम किए जा रहा है। यह मामला है मुहल्ला कुरैचा के भैरव मंदिर का। कुत्ता भैरव का वाहन होता है इसलिए कुत्ते की भक्ति को लेकर लोगों में काफी हैरानी का माहौल बना हुआ है।
विज्ञापन


यहां के लोग बताते हैं कि शुरू में जब कुत्ता मंदिर की परिक्रमा कर रहा था तब सभी ने इसे सामान्य रूप में लिया कि कुत्ता यूं ही घूम रहा है। लेकिन जब इस पर ध्यान दिया गया तो पाया कि कुत्ता लगातार कुछ सीधी फिर उलटी परिक्रमा कर रहा है तब लोगों में कौतुहल जग उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन


मंदिर के महंत अटलानंद ने यह भी बताया कि कुत्ता परिक्रमा करते-करते शिव जी के आगे शिर भी झुका रहा है तो लोगों में कुत्ते के लेकर दस तरह की बातें भी होने लगी हैं। लेकिन क्या यह कुत्ते द्वारा ऐसा किया जाने वाला पहला मामला है या इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। यह कुत्ते की भक्ति है या कुछ और है अब यह भी जान लीजिए।

नया नहीं है कुत्ते का परिक्रमा करने का यह मामला

story of dog bhakti

जिस तरह कुत्ते द्वारा शिवलिंग की परिक्रमा की खबर झांसी से आ रही है ठीक इसी तरह का मामला बीते साल भी अप्रैल के महीने में आया था। उस समय अबकी कुत्ते द्वारा किए जाने वाले परिक्रमा में अंतर सिर्फ इतना है कि वह कुत्ता शिव जी नहीं हनुमान जी का भक्त था।

बीते साल का यह मामला मध्यप्रदेश के मुड़ागांव का था। यहां एक प्राचीन हनुमान मंदिर है स्थानीय लोग इसे बजरंगबली-श्रीजानकी मंदिर के नाम से जानते हैं। अप्रैल महीने के पहले हफ्ते की बात है, जब लोग मंगलवार के दिन पूजा करने मंदिर आए तो एक कुत्ते को मंदिर के चारों ओर घूमते देखा।

पहले तो लोगों ने कुत्ते की इस हरकत पर कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ लोग कुत्ते को ऐसा करते देख हंस भी रहे थे। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद कुत्ते पर हंसने वाले लोग भी दांतों तले उंगली दबाने लगे। लोगों को कुत्ते की भक्ति के आगे अपनी श्रद्धा भक्ति कम लगने लगी।

कुत्ता लगातार बिना भोजन और पानी के हनुमान मंदिर की परिक्रमा करता जा रहा था। यह सिलसिला तीन दिनों तक चलता रहा। कुत्ता हर परिक्रमा पूरी करने के बाद हनुमान जी के समाने माथा टेकता और फिर परिक्रमा शुरू कर देता।

सोमवारी का व्रत रखने वाला कुत्ता

story of dog bhakti

आर्यसंयासी श्रीस्वामी केवलानंद जी महाराज के आश्रम में एक कुत्ता था। इस कुत्ते की खूबी थी कि मंगलवार से रविवार तक जो भोजन मिलता खा लेता।

लेकिन सोमवार के दिन इसे कुछ भी खिलाने की कोशिश करें यह भोजन नहीं करता।
स्वामी जी भी इस बात से आश्चर्यचकित थे कि इस कुत्ते को दिन का पता कैसे चल जाता है।

एकादशी का व्रत रखने वाले कुत्ते की तरह यह भी सोमवार के दिन निराहार रहता। अगर कोई इसे भोजन करवाने का अधिक प्रयास करता तो भोजन लेकर कहीं छुपा आता था।

मंगलवार का व्रत रखने वाला कुत्ता

story of dog bhakti

आर्यसमाज के श्रीसुखदेवजी शास्त्री के बहन के घर में विवाह था। विवाह में इनके मामा जी के साथ उनका एक कुत्ता भी आया। मामा जी के साथ आए कुत्ते को लोगों ने गांव का कोई सामान्य कुत्ता समझकर डंडे से मारकर भगाना चाहा।

डंडे की चोट से कुत्ता चिल्लाने लगा। इतने में इनके मामा जी दौड़कर आए और बताने लगा यह क्या किया। इस कुत्ते को मत मारो यह बड़ा ही धर्मात्मा कुत्ता है। इन्होंने बताया कि यह कुत्ता आज पूरे दिन व्रत में है क्योंकि घर में कन्या का विवाह है। कन्यादान के बाद यह भोजन करेगा।

लोगों ने इस बात की सत्यता को जांचने के लिए कुत्ते के आगे भोजन रखा लेकिन कुत्ते ने भोजन को देखकर मुंह घुमा लिया। रात में जब कन्यादान हो गया तब इस कुत्ते ने भी भोजन किया।

श्रीसुखदेव जी के मामा जी ने यह भी बताया कि यह कुत्ता हनुमान जी का बड़ा भक्त है, हर मंगलवार को व्रत रखता है।

एकादशी का व्रत रखने वाला कुत्ता

story of dog bhakti

देहरादून में एक तपोवन आश्रम है। इसे श्रीगुरुमुखसिंहजी ने बनवाया है। इस तपोवन में एक कुत्ता रहता है जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यह नियमपूर्वक सभी एकादशी का व्रत रखता है।

एकादशी के दिन अगर इस कुत्ते के आगे रोटी या कुछ भी खाने की चीजें डाली जाती हैं तो यह अपना मुंह घुमा लेता है या भोजन के पास से हट जाता है। यह कुत्ता मांस-मछली कुछ नहीं खाता।

लोगों को इस बात की हैरानी होती है कि इस कुत्ते को कैसे पता चल जाता है कि आज एकादशी है। लोगों ने कई बार जब इसे एकादशी व्रत करते हुए देखा तो उन्होंने अंदाजा लगाया कि यह पूर्वजन्म में मनुष्य रहा होगा और एकादशी व्रत करता रहा होगा। किसी पाप कर्म के कारण यह कुत्ता बना है।

एकादशी के दिन अगर इस कुत्ते को जबरन रोटी खिलाने का प्रयास किया जाता है तो रोटी उठाकर कहीं छिपा देता है और द्वादशी के दिन उस रोटी को खाकर अपना व्रत खोलता है।

45 घंटों से सिर झुकाकर शिवलिंग की परिक्रमा कर रहा है ये कुत्ता

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed