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महाकुंभ में सच हो रही फिल्मी कहानी

Tue, 12 Feb 2013 11:24 PM IST
इलाहाबाद/अंकुर त्रिपाठी
इलाहाबाद/अंकुर त्रिपाठी Updated Tue, 12 Feb 2013 11:24 PM IST
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stampede in maha kumbh many dead bodies missing

अभी तक आप फिल्मी पर्दे पर ही देखते आए हैं कि महाकुंभ में एक परिवार आता है और यहां किसी हादसे का शिकार हो जाता है। नतीजा यह कि परिवार के लोग एक-दूसरे से बिछुड़ जाते हैं। ऐसा ही कुछ इस महाकुंभ में नजर आ रहा है।

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रविवार को रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद महाकुंभ में भाग लेने आए कई परिवार अपनों के बिछुड़ जाने से हलाकान हैं। हालांकि प्रशासन ने संचार व्यवस्था चाक-चौबंद कर रखी है, इसके बावजूद खोए हुए लोग मिल नहीं रहे हैं।
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गाजियाबाद निवासी केशव प्रसाद रविवार रात से ही बदहवासी की हालत में स्टेशन और अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल के हर बेड पर पत्नी बेला देवी और बेटे विवेक को तलाश रहे हैं। लेकिन भगदड़ में गायब अपनों का पता नहीं चल सका है। केशव का कहना है कि जब तक उनकी पत्नी और बेटे का पता नहीं चलता, वह घर नहीं जाएंगे।
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हादसे के ऐसे शिकार केवल केशव ही नहीं हैं। इटावा के त्रिलोकी पाल, फिरोजाबाद की सविता देवी, शाहजहांपुर की विनीता पटेल के परिजन रेलवे स्टेशन पर मौनी अमावस्या की रात मची भगदड़ के बाद से गायब हैं। 48 घंटे बाद भी उनका पता नहीं है। उनके परिजन और रिश्तेदार तलाश में यहां-वहां भटक रहे हैं। रोते-कलपते हुए वे कभी चीरघर पहुंचते हैं तो कभी पुलिस चौकी। भगदड़ के वक्त बड़ी संख्या में गायब हुए लोगों के बारे में पुलिस-प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है।

क्या गायब कर दिए गए शव?
सवाल है कि गायब लोग न भगदड़ में घायल हुए और न ही मरे, तो गए कहां? शायद इसी कारण इन अफवाहों को बल मिल रहा कि भगदड़ के बाद कुछ शवों को गायब कर दिया गया है। इस पर कुछ लोग मंगलवार को मुख्यमंत्री से सवाल भी करना चाहते थे पर सुरक्षाकर्मियों ने फटकने तक नहीं दिया।


पूरा परिवार ही हो गया गुम

स्टेशन पर मची भगदड़ ने बिहार में भागलपुर जिले के एक परिवार को गहरा सदमा दिया है। भागलपुर के हीरालाल महतो (55), उनकी पत्नी (52), रिश्तेदार मनिया देवी (65) समेत सात लोग रविवार रात से गायब हैं। हीरालाल का पुत्र जीतेंद्र कई रिश्तेदारों के साथ उनकी तलाश में भटक रहा है। न मेले में मिले न स्टेशन या शहर में। मोबाइल भी बंद है।

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