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भव्य पेशवाई के साथ पहुंचे शंकराचार्य स्वरूपानंद

Sat, 02 Feb 2013 10:30 AM IST
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 02 Feb 2013 10:30 AM IST
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shankarcharya swaroopanand given warm welcome
ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती शुक्रवार को भव्य पेशवाई के साथ कुंभ नगरी स्थित शिविर पहुंचे। इसी के साथ नाराज शंकराचार्य के कुंभ क्षेत्र में पहुंचने को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों पर विराम लग गया। रामबाग पथरचट्टी रामलीला मैदान से शुरू पेशवाई विभिन्न मार्गों से होकर सेक्टर ग्यारह स्थित कुंभ मेला क्षेत्र छावनी पहुंची। शाही पेशवाई में 108 रथ, 40 बैंड और दो दर्जन से अधिक झांकियां शामिल थीं।
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शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने महाकुंभ ही नहीं सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा, भक्तों का स्नेह ही संगम तट तक खींच लाया है। शुरुआत में रामलीला कमेटी के महामंत्री आनंद सिंह ने उनकी आरती उतारी। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और शिविर में भी यह सिलसिला रात तक जारी रहा। मंगल शंखध्वनि और सुस्वागतम के जयघोष के बीच अनेक अखाड़ों के संत, महंत, दंडी संन्यासी साथ दिखे। उनके प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सहित अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहंत गोपालानंद ब्रह्मचारी ने पेशवाई का संचालन किया।
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विघ्नहर्ता गणपति की अगुवाई में फूलों-फलों से सुसज्जित रथ पर शंकराचार्य विराजमान थे। उन्हीं के पीछे चारों धाम और चारों ही पीठों के विग्रह का रथ चला। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद पुरी चरणपादुका के पास बैठे। निजी सचिव स्वामी सुबुधानंद ब्रह्मचारी, अखिल भारतीय दंडी प्रबंध सभा के अध्यक्ष विमलदेव आश्रम भी साथ थे। जुलूस में बड़ी संख्या में विदेशी भक्त भी शामिल थे।
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वयोवृद्ध गोपालानंद ने किया नेतृत्व
अग्नि अखाड़े के वयोवृद्ध सभापति गोपालानंद ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य स्वरूपानंद की पेशवाई का नेतृत्व किया। पूरे रास्ते वह मुस्तैदी के साथ जुलूस को नियंत्रित करते रहे। उनके साथ अखाड़े के श्रीमहंत गोविंदानंद ब्रह्मचारी, श्रीमहंत कैलाशानंद ब्रह्मचारी भी थे।


आकर्षण का केंद्र रहा हरिद्वार का स्वर्णिम रथ
शंकराचार्य के लिए स्वर्णिम आभा वाला रथ सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। इसे जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद पुरी हरिद्वार से लाए थे। उन्होंने कहा, शंकराचार्य स्वरूपानंद उनके गुरु हैं और उनके प्रति श्रद्धा, सम्मान उनका दायित्व है, जिसके निर्वाह का प्रयास किया है।

रथों पर अंकित रहा शंकराचार्य का संदेश
शोभायात्रा में शामिल सभी रथों पर शंकराचार्य का संदेश लिखा रहा। इस पर उत्तम पूजन, उत्तम संस्कार, उत्तम मर्यादा और उत्तम व्यवहार के सूत्र शामिल थे।
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