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संतों की सियासत में गुम हो गया मोदी का नाम

Fri, 15 Feb 2013 09:26 AM IST
अमित सरन/महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)
अमित सरन/महाकुंभ नगर (इलाहाबाद) Updated Fri, 15 Feb 2013 09:26 AM IST
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saints are not agree on the name of modi for pm candidate

संतों की सियासत में मोदी का मुद्दा गुम हो गया। तैयारी थी कि महाकुंभ में नरेंद्र मोदी को भाजपा से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करा दिया जाएगा, लेकिन विहिप अपनी तमाम कोशिशों में नाकाम रहा। संतों के अलग-अलग खेमों में बंट जाने, अलग-अलग पार्टियों की तरफ रुझान होने और भाजपा में अंतर्विरोध के कारण अंतत: यह मुद्दा कुंभ की डायरी में अपनी जगह नहीं बना सका। हालांकि विहिप की धर्म संसद में दो-तीन संतों ने मोदी का नाम लिया, लेकिन दूसरे संतों ने कुंभ में राजनीतिक बहस पर अपना विरोध जताकर मामला दबा दिया।

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मोदी के नाम पर साधु-संतों के विचारों में उसी दिन टकराव दिखा, जब श्रीगुरु कर्ष्णि आश्रम में पहला संत सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में मोदी के नाम पर चर्चा होनी थी। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल भी इसमें शामिल हुए। डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बैठक हुई। मीडिया को प्रवेश से रोक दिया गया। इस बैठक में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती, बाबा रामदेव जैसे संत भी शामिल हुए। इसमें दलाईलामा को भी आना था लेकिन किसी कारण से वह नहीं आ सके, तो उनके शिष्य रिनपोछे बैठक में पहुंचे।
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मोदी के नाम पर एकमत नहीं थे संत
बैठक के बाद कमरे से बाहर निकलने पर संतों के चेहरे पर झलकता तनाव साफ देखा जा सकता था। उस वक्त अशोक सिंहल सहित सभी संतों ने मोदी के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया जबकि बैठक में मौजूद सूत्र बताते हैं कि मोदी के नाम पर चर्चा हुई थी। ऐसे में अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि मोदी के नाम पर संत एकमत नहीं हो सके।
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सूत्रों का कहना है कि मोदी पर संतों की एक राय न होने के कारण ही उनके कुंभ में आने का कार्यक्रम स्थगित हो गया। मोदी के बाद सोनिया गांधी के भी यहां आने का कार्यक्रम था लेकिन अब उनके आने पर भी संशय है। कांग्रेस की रणनीति थी कि कुंभ से मोदी के लौटने के बाद सोनिया संतों से मिलेंगी और कांग्रेस अपना पक्ष रखकर संतों के बीच भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार करेगी।


मोदी भले ही नहीं आए लेकिन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पार्टी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे सिंधिया, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नेता यहां आए और उन संतों से भी मिले, जिन पर पार्टी का टैग लगा होने की बात कही जाती है। ऐसे में कांग्रेस कैसे पीछे रहती। उत्तराखंड के सीएम विजय बहुगुणा, केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल सहित पार्टी के तमाम नेताओं ने यहां आकर पार्टी के करीबी संतों से मुलाकात की तो सपा नेता एवं प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद आजम खां ने भी कुंभ में एक ऐसे संत के पास जाकर उनका आशीर्वाद लिया, जो शुरू से मोदी का विरोध कर रहे हैं।

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