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धार्मिक व्यक्ति को ही मिलती है प्रभु कृपा: सुधांशु जी
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2013 10:34 AM IST
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प्रख्यात कथावाचक सुधांशु जी का कहना है कि प्रत्येक शिवालय में स्थित नंदी धर्म के प्रतीक होते हैं। उनका मुख शिव की ओर ही होता है और उन पर शिव सवार होते हैं। इसी प्रकार जिस व्यक्ति में धर्म होता है, वही परमात्मा की कृपा का पात्र होता है।
शुक्रवार को कुंभ नगर के सेक्टर छह स्थित शिविर में विराट भक्ति सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने धर्म की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा, जिस व्यक्ति के जीवन में हिंसा नहीं बल्कि सभी के लिए प्रेम होता है, जिसके आचरण में सत्यता है, वह व्यक्ति धार्मिक है।
उन्होंने कहा, जीवन में धर्म के साथ निर्भीकता, निश्चिंतता, संतुष्टि और आनंद है, वही व्यक्ति धार्मिक है। वस्तुत: क्रोधरहित, सहनशील और सरल होना, दूसरों के प्रति सम्मान और सेवा की भावना रखना भी धार्मिक होने के लक्षण है। इसी तरह त्याज्य कर्मों से बचना और शुद्ध तथा पवित्र भोजन करना भी धार्मिक लोगों की विशेषता है।
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उन्होंने कहा, व्यक्ति का धार्मिक होना उसे सभी प्रकार से परिपूर्ण बनाता है। धार्मिक व्यक्ति जीवन, समाज और राष्ट्र में सभी प्रकार से सफल होता है। उसका आचरण न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी फलदायी होता है। श्रद्धा और धर्म के साथ मिलने से ही शुभता आती है।
मित्रता धर्म की शक्ति है और इसकी भावना आने से प्रसन्नता और दया आने से निर्भयता की प्राप्ति होती है। प्रवक्ता जेके जिंदल के मुताबिक कथा 24 फरवरी तक रोज सुबह आठ और शाम चार बजे से होगी।
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शुक्रवार को कुंभ नगर के सेक्टर छह स्थित शिविर में विराट भक्ति सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने धर्म की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा, जिस व्यक्ति के जीवन में हिंसा नहीं बल्कि सभी के लिए प्रेम होता है, जिसके आचरण में सत्यता है, वह व्यक्ति धार्मिक है।
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उन्होंने कहा, जीवन में धर्म के साथ निर्भीकता, निश्चिंतता, संतुष्टि और आनंद है, वही व्यक्ति धार्मिक है। वस्तुत: क्रोधरहित, सहनशील और सरल होना, दूसरों के प्रति सम्मान और सेवा की भावना रखना भी धार्मिक होने के लक्षण है। इसी तरह त्याज्य कर्मों से बचना और शुद्ध तथा पवित्र भोजन करना भी धार्मिक लोगों की विशेषता है।
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उन्होंने कहा, व्यक्ति का धार्मिक होना उसे सभी प्रकार से परिपूर्ण बनाता है। धार्मिक व्यक्ति जीवन, समाज और राष्ट्र में सभी प्रकार से सफल होता है। उसका आचरण न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी फलदायी होता है। श्रद्धा और धर्म के साथ मिलने से ही शुभता आती है।
मित्रता धर्म की शक्ति है और इसकी भावना आने से प्रसन्नता और दया आने से निर्भयता की प्राप्ति होती है। प्रवक्ता जेके जिंदल के मुताबिक कथा 24 फरवरी तक रोज सुबह आठ और शाम चार बजे से होगी।