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रंगीली कू जुड़वे लगौ रसिकन कौ मेला
बरसाना।
Updated Wed, 20 Mar 2013 09:38 AM IST
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रंगीली के लै रसिकन कौ मेला जुड़वे लगौ है। देश के कोने कोने ते श्यामा श्याम संग होरी खेलवे कू श्री जी के धाम में इकट्ठे है गए हैं। कछु नै वृंदावन के आश्रमन मै डेरा डालौ है तौ कछु बरसाना की धर्मशालान में ठहरे हैं। सोमवार की शाम लाडली जी के मंदिर में रसिकन कौ आनंद छायौ। गुलाल में रंगे नाचते गाते होरी में डूबे भये।
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इन भक्तों में दस साल का अनुभव दूर से नजर आता था। गले में माला पहने वह भी झूम रहा था। उसके पिता ब्रज कुमार यादव मैनपुरी से बेटे को रंगीली होली दिखाने आए हैं।
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दिल्ली की रेनू और उनके परिवार के लिए बरसाना और रंगीली दोनों ही बेहद खास है। उन्होंने बताया कि मैं 14 साल से यहां आ रही हूं। राधा रानी से जो मन्नत मांगी, पूरी हुई। उन्हीं की कृपा से मेरा बेटा पैदा हुआ इसलिए उसका नाम कान्हा रखा। यहां होली पर बहुत आनंद आता है। बरसाना में स्वर्ग है।
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फरीदाबाद के युवा चंद्रभान के पांव में प्लास्टर था फिर भी वह समाज गायन में खुद को झूमने से न रोक सका। उसने बताया कि एक महीने पहले एक्सीडेंट हुआ था। डाक्टर ने आराम करने की सलाह दी पर रंगीली आते ही कहां घर में रहा जाता है। सो अपने साथियों के साथ यहां चला आया। यहां हर दर्द ठीक हो जाता है। आनंद ही आनंद है।
लुधियाना से आई युवती शक्ति का चेहरा गुलाल से रंगा था। अपने पिता राजकुमार शर्मा के साथ फाग के उल्लास में नाच रही थी।
पहली बार रंगीली होली देखने आई शक्ति ने बताया कि यहां आकर बहुत अच्छा फील कर रही हूं। ब्रज की संस्कृति के बारे में पढ़ा था पर आज जी रही हूं। यह अनुभूति लुधियाना या दिल्ली में नहीं मिल सकती। अब हर बार आऊंगी।