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दुनिया भर से आएंगे संगम की रेती पर ‘राम’

Mon, 21 Jan 2013 12:35 PM IST
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/अनिल सिद्धार्थ
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/अनिल सिद्धार्थ Updated Mon, 21 Jan 2013 12:35 PM IST
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'ram' came from all over world in mahakumbh
कुंभ मेले में संगम की रेती पर दुनिया भर से ‘राम’ भी आएंगे। यह राम शब्दरूप होंगे जिन्हें संगम की रेती के रामनाम बैंक से बांटी गई रामनाम पुस्तिका पर अलग-अलग देशों के रामभक्तों की ओर से अलग-अलग भाषाओं तथा पद्धतियों में लिखा और पूजा गया है।
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कल्पवासियों की सुविधा के लिए कुंभ क्षेत्र के सेक्टर छह में खुलने वाले रामनाम बैंक में रामधन जमा करने को काउंटर बनाया जाएगा। इसमें देशी-विदेशी रामनाम खाताधारक रामनाम पुस्तिकाएं जमा कर सकेंगे।
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कुंभ के दौरान रामनाम पुस्तिकाएं जमा करने को नीदरलैंड वासियों की रामनाम पुस्तिकाएं लेकर हैंक केलमैन, आयरलैंड की पुस्तिकाएं लेकर आइजक ब्रुक्स, इंग्लैंड से जार्ज फ्रैंकलिन, अमेरिका से जॉन रौड्रिक्स, कनाड़ा से कैंनिंग माइकल सहित तकरीबन दो दर्जन देशों के प्रतिनिधि आएंगे। इसके अतिरिक्त देश के कोने-कोने से भी रामभक्त जुटेंगे। मान्यता है कि संगम के अक्षय क्षेत्र में अर्जित पुण्य अक्षय होगा।
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रामनाम सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष गुंजन वार्ष्णेय के मुताबिक कुंभ में मानव कल्याण के लिए सिर्फ सनातन धर्म ही नहीं बल्कि मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित अन्य धर्म के लोग भी राम नाम लिखेंगे। कुंभ के दौरान सवा लाख रामनाम लिखने का संकल्प करने वाले रामबैंक के ऐसे खाताधारकों को जिनके पास कोई ठौर नहीं, उन्हें नि:शुल्क कल्पवास करने की सुविधा भी दी जाएगी।

रामनाम बैंक खाते की खूबियां

-संगम की रेती पर करोड़ों रामनाम अंकित प्रपत्रों को एकत्र करके परिक्रमा पथ बनाया जाएगा।
-रामनाम बैंक के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए कुंभ के दौरान ही वेबसाइट भी लांच की जाएगी
-सभी देसी-विदेशी खाताधारकों को एक सूत्र में पिरोने के लिए पैननंबर की तरह ‘राम नंबर’ दिया जाएगा ताकि कहीं से भी जमा रामनाम को उस पर अंकित किया जा सके।
-रेती का रामनाम बैंक भी श्रद्धालुओं को पासबुक जारी करेगा जिसमें कुंभ के दौरान रामधन चढ़ाया जाएगा।
-सारा काम नेट के जरिये होगा ताकि जो लोग कुंभ में शामिल नहीं हैं, वे भी ई मेल से रामनाम भेजकर कुंभ का पुण्य अर्जित कर सकें।
-कई निजी बैंकों की तर्ज पर ही संगम की रेती के रामनाम बैंक को भी ‘जीरो बैलेंस’ से खोला जा सकेगा। रामनाम पुस्तिका भी नि:शुल्क होगी।
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