फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Astrology Archives ›   rajasthan kiradu temple mystery

इस मंदिर में जो रात को ठहरा बन गया पत्थर का

Thu, 05 Jun 2014 04:21 PM IST
Updated Thu, 05 Jun 2014 04:21 PM IST
विज्ञापन
rajasthan kiradu temple mystery

राजस्थान की रेतीली धरती में कई राज दफन हैं। यह राज ऐसे हैं जिन्हें जानकर बड़े-बड़े सूरमाओं के पसीने छूट जाते हैं। कुलधारा गांव और भानगढ़ का किला ऐसे ही रहस्यमय स्थानों में से एक है जो भूतहा स्थान के रुप में पूरी दुनिया में जाने जाते है।

विज्ञापन


कुलधारा और भानगढ़ से अलग एक और रहस्यमय स्थान है जो बारमेर जिले में स्थित है। यह स्थान है किराडू का मंदिर।


पूरे राजस्थान में खजुराहो मंदिर के नाम से प्रसिद्घ यह मंदिर प्रेमियों को विशेष आकर्षित करता हैं। लेकिन यहां की ऐसी खौफनाक सच्चाई है जिसे जानने के बाद कोई भी यहां शाम के बाद ठहरने की हिम्मत नहीं कर सकता।
विज्ञापन

वह पत्थर का बन जाता है

rajasthan kiradu temple mystery

किराडू के मंदिर विषय में ऐसी मान्यता है कि यहां शाम ढ़लने के बाद जो भी रह जाता है वह या तो पत्थर का बन जाता है या मौत की नींद सो जाता है। किराडू के विषय में यह मान्यता वर्षों से चली आ रही है। पत्थर बन जाने के डर से यहां शाम ढ़लते ही पूरा इलाका विरान हो जाता है।

इस मान्यता के पीछे एक अजब दास्तान है जिसकी गवाह एक औरत की पत्थर की मूर्ति है, जो किराडू से कुछ दूर सिहणी गांव में स्थित है।


इस तरह किराडू के लोग बन गए पत्थर के

rajasthan kiradu temple mystery

वर्षों पहले किराडू में एक तपस्वी पधारे। इनके साथ शिष्यों की एक टोली थी। तपस्वी एक दिन शिष्यों को गांव में छोड़कर देशाटन के लिए चले गए। इस बीच शिष्यों का स्वास्थ्य खराब हो गया।

गांव वालों ने इनकी कोई मदद नहीं की। तपस्वी जब वापस किराडू लौटे और अपने शिष्यों की दुर्दशा देखी तो गांव वालों को शाप दे दिया कि जहां के लोगों के हृदय पाषाण के हैं वह इंसान बने रहने योग्य नहीं हैं इसलिए सब पत्थर के हो जाएं।

एक कुम्हारन थी जिन्होंने शिष्यों की सहायता की थी। तपस्वी ने उस पर दया करते हुए कहा कि तुम गांव से चली जाओ वरना तुम भी पत्थर की बन जाओगी। लेकिन याद रखना जाते समय पीछे मुड़कर मत देखना।

कुम्हारन गांव से चली गई लेकिन उसके मन में यह संदेह होने लगा कि तपस्वी की बात सच भी है या नहीं वह पीछे मुड़कर देखने लगी और वह भी पत्थर की बन गयी। सिहणी गावं में कुम्हार की पत्थर की मूर्ति आज भी उस घटना की याद दिलाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed