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महाकुंभ: पीछे नहीं हटे कदम, जाने के साथ आने वालों का भी रेला
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Tue, 12 Feb 2013 11:43 AM IST
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रामबाग रेलवे स्टेशन पर सोमवार को भी स्नानार्थियों का हुजूम उमड़ा। खास यह कि इसमें जितने लोग जाने वाले थे उतनी ही भीड़ स्नान के लिए आने वालों की भी रही। जंक्शन पर रविवार को हुई दुर्घटना में 37 लोगों की मौत के बाद भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं डिगे। हालांकि इस घटना से सबक लेते हुए दोनों स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया था।
इन स्टेशनों तथा आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। संगम से रामबाग आने वाली सड़क पर दोनों तरफ दूर-दूर तक स्नानार्थियों की कतार लगी रही। रविवार की घटना से सबके लेते हुए रेल प्रशासन ने श्रद्धालुओं को स्टेशन परिसर के बाहर ही रोक दिया था, जिनकी ट्रेन थी उन्हें ही अंदर जाने दिया जा रहा था। इसकी वजह से परिसर तथा प्लेटफार्म पर तो बहुत भीड़ नहीं रही लेकिन बाहर हजारों लोगों की मौजूदगी की वजह से पूरे दिन जाम की स्थिति रही।
अंदर प्रवेश नहीं मिलने के कारण हजारों लोग सड़क के किनारे ही चादर आदि बिछाकर पड़े रहे। गोरखपुर से आए पवन जायसवाल, रितेश, राहुल सिंह आदि का कहना था कि वे रात से ही इसी तरह से सड़क पर हैं। स्टेशन के बाहर पर्याप्त संख्या में पुलिस का इंतजाम नहीं होने के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रही। इसके विपरीत प्रयाग स्टेशन पर लोगों को परिसर तथा प्लेटफार्म आने-जाने पर कोई रोक नहीं थी। हजारों लोग प्लेटफार्म ही सोए हुए थे। पैर रखने के लिए भी जगह नहीं थी।
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लोग किनारे-किनारे किसी तरह से जगह बनाकर आ-जा रहे थे। हालांकि किसी तरह की अफरातफरी न होने पाए इसलिए एक-एक करके ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था। इसकी वजह से वहां कई बार लाइन भी लगानी पड़ी।
सैकड़ों लोगों का समूह सोमवार को ही यहां आया था। ये लोग पटना से आए थे। खास यह कि इन्हें रविवार की रात में हादसे की भी जानकारी हो गई थी। फिर भी श्रद्धा के आगे भय काफूर था। उनका कहना था कि ‘माघ में गंगा स्नान का संकल्प है। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन आना-जाना या दिनचर्या रुक गई क्या। जो होगा देखा जाएगा।’
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इन स्टेशनों तथा आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। संगम से रामबाग आने वाली सड़क पर दोनों तरफ दूर-दूर तक स्नानार्थियों की कतार लगी रही। रविवार की घटना से सबके लेते हुए रेल प्रशासन ने श्रद्धालुओं को स्टेशन परिसर के बाहर ही रोक दिया था, जिनकी ट्रेन थी उन्हें ही अंदर जाने दिया जा रहा था। इसकी वजह से परिसर तथा प्लेटफार्म पर तो बहुत भीड़ नहीं रही लेकिन बाहर हजारों लोगों की मौजूदगी की वजह से पूरे दिन जाम की स्थिति रही।
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अंदर प्रवेश नहीं मिलने के कारण हजारों लोग सड़क के किनारे ही चादर आदि बिछाकर पड़े रहे। गोरखपुर से आए पवन जायसवाल, रितेश, राहुल सिंह आदि का कहना था कि वे रात से ही इसी तरह से सड़क पर हैं। स्टेशन के बाहर पर्याप्त संख्या में पुलिस का इंतजाम नहीं होने के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रही। इसके विपरीत प्रयाग स्टेशन पर लोगों को परिसर तथा प्लेटफार्म आने-जाने पर कोई रोक नहीं थी। हजारों लोग प्लेटफार्म ही सोए हुए थे। पैर रखने के लिए भी जगह नहीं थी।
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लोग किनारे-किनारे किसी तरह से जगह बनाकर आ-जा रहे थे। हालांकि किसी तरह की अफरातफरी न होने पाए इसलिए एक-एक करके ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था। इसकी वजह से वहां कई बार लाइन भी लगानी पड़ी।
सैकड़ों लोगों का समूह सोमवार को ही यहां आया था। ये लोग पटना से आए थे। खास यह कि इन्हें रविवार की रात में हादसे की भी जानकारी हो गई थी। फिर भी श्रद्धा के आगे भय काफूर था। उनका कहना था कि ‘माघ में गंगा स्नान का संकल्प है। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन आना-जाना या दिनचर्या रुक गई क्या। जो होगा देखा जाएगा।’