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शाही स्नान में शामिल होंगी राधे मां
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jan 2013 09:56 PM IST
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‘विवादित संत राधे मां, अब विवादित नहीं रहीं। उन पर लगाए गए सभी तरह के आरोप निराधार हैं, जांच में ऐसी कोई बात नहीं पाई गई जिसके आधार पर उन्हें दोषी साबित किया जा सके।’ पौने तीन सौ पेज की रिपोर्ट में चार पेज की मूल टिप्पणी के अतिरिक्त अलग-अलग लोगों की ओर से 250 पृष्ठों में शपथपत्र संलग्न है।
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राधे मां को महामंडलेश्वर बनाने के बाद उठे विवाद की जांच को बनी कमेटी ने यह टिप्पणी की है। चार महीने तेरह दिन की पड़ताल के बाद बुधवार को जांच कमेटी के सदस्यों ने जो रिपोर्ट दी, उसमें उन्हें बेदाग साबित कर दिया। इसमें उन्हें सभी तरह के आरोपों से बरी कर दिया गया है। आरोपों से बरी होने के बाद राधे मां का महाकुंभ में पहुंचना तय हो गया है। माना जा रहा है कि दूसरे शाही स्नान मौनी अमावस्या से पहले वह महाकुंभनगर में पहुंच जाएंगी।
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दरअसल, जूना की ओर से आनन-फानन में राधे मां को महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर विवाद हुआ था। बाद में जूना के जिम्मेदार पदाधिकारियों की बैठक में उनकी महामंडलेश्वर की पदवी को निलंबित करते हुए ग्यारह सदस्यीय जांच कमेटी बैठा दी गई थी।
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जूना के सचिव और कुंभ मेला प्रभारी श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती की अध्यक्षता में बनी टीम में पटियाला के काली माता मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु पंचानंद गिरि को जांच प्रमुख बनाया गया था। कमेटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी जिसमें राधे मां पर लगे सभी आरोप खारिज कर दिए गए।
पौने तीन सौ पेज की रिपोर्ट में चार पेज की मूल टिप्पणी के अतिरिक्त अलग-अलग लोगों की ओर से 250 पृष्ठों में शपथपत्र संलग्न है। जांच के दौरान टीम उनके मुंबई, लुधियाना, गुजरात, हरियाणा के आश्रमों सहित पंजाब के मुकेरिया स्थित ससुराल भी पहुंची। सदस्यों ने सभी पक्षों से बातचीत की।
इस रिपोर्ट से लगभग तय हो गया है कि बतौर महामंडलेश्वर वह दूसरे शाही स्नान में शामिल होंगी। हालांकि जूना के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने साफ तौर पर कुछ भी कहने से इनकार किया लेकिन उन्होंने इतना जरूर जोड़ा कि सब कुछ चुस्त-दुरुस्त रहा तो कुछ भी संभव है।
उनके मुताबिक कमेटी की रिपोर्ट को जूना की 52 मढ़ियों के प्रमुखों के सामने रखा जाएगा। इसके दो तिहाई बहुमत से पास होने के बाद ही राधे मां के बारे में कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
इन तथ्यों से हुए खारिज
जहां तक नाचने-गाने का सवाल है, मीरा भी कृष्ण की भक्ति में लीन होकर नाचती थीं। भक्तों की गोद में बैठना मन्नतें पूरी होने के बाद होता है। मन्नत के बाद पति और पत्नी दोनों ही श्रद्धा के वशीभूत होकर उन्हें झूला झुलाते हैं। इसी तरह वह चौदह दिनों तक साधना के बाद पंद्रहवें दिन चौकी लगाकर श्रद्धालुओं को दर्शन देती हैं।
पांच वर्ष पहले बनीं संत
मूल रुप से गुड्डी अब मुंबई के मलाड आश्रम की प्रमुख राधे गिरि ने तकरीबन पांच वर्ष पहले काली माता मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु पंचानंद गिरि से पंचकूला, चंडीगढ़ में संन्यास की दीक्षा ली थी। पति के दुबई जाने पर उन्होंने साधना की राह पकड़ ली और एक संत के आश्रम से नाता जोड़ लिया। पति लौटे पर दोनों में अब संत और श्रद्धालु का रिश्ता शेष है। उनकी दो संताने हैं, दोनों अलग हैं।
राधे मां पर लगे मुख्य आरोप
--अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्मैक सहित कई तरह के मादक पदार्थों की तस्करी।
--अलग तरह से माता की चौकियां लगाकर धर्म का अपमान।
--नाच-गाकर भक्तों को रिझाना और मगन होकर उनकी गोद में जा बैठना।