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स्नान के बाद श्रद्धालुओं को दिखे ‘भगवान’

Mon, 28 Jan 2013 12:02 PM IST
अमित सरन/महाकुंभ नगर
अमित सरन/महाकुंभ नगर Updated Mon, 28 Jan 2013 12:02 PM IST
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pilgrims saw 'god' after bath
कहते हैं, बच्चों में भगवान बसते हैं। पौष पूर्णिमा पर लोगों ने यह भी देखा। संगम में स्नान के बाद श्रद्धालुओं को वापसी मार्ग पर ‘कृष्ण भगवान’ के दर्शन हुए। भगवान पर चढ़ावे की बौछार हो गई। दोपहर 12 बजे का वक्त था। संगम घाट पर स्नान के बाद अक्षयवट मार्ग से लौट रहे श्रद्धालुओं के कदम पटरी पर बैठे एक बच्चे को देखकर खुद-ब-खुद ठहर जाते। तीन साल के इस बच्चे का नाम अंजुल है, जो भगवान कृष्ण की ड्रेस पहनकर भिक्षा मांगता है लेकिन रविवार को उसे किसी से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ी।
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अंजुल के सामने रखे कटोरे में कोई एक तो कोई पांच रुपए का सिक्का खुद ही डाल देता, हाथ जोड़कर उसे प्रणाम भी करता, जय श्रीकृष्ण बोलता और आगे बढ़ जाता। आधे घंटे में अंजुल के सामने रखा कटोरा सिक्कों से भर गया लेकिन वह मोबाइल पर गाना सुनने में ही व्यस्त रहा और बीच-बीच में रांग नंबर डायल कर किसी से भी बात कर लेता।
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बगल में बैठा एक व्यक्ति कटोरे के सिक्कों को एक झोली में डालकर खाली कटोरा अंजुल के सामने दोबारा रख देता। अंजुल ने तोतली आवाज में अपना नाम बताया और जब पूछा गया कि वह कहां रहता है तो जवाब दिया कि मेला में घर है संगम घाट पर स्नान के बाद वापसी के लिए निर्धारित रास्तों में सबसे ज्यादा भीड़ अक्षयवट मार्ग पर रहती है।
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रविवार को इस मार्ग से निकलने वालों को लगा की वहां कोई फैंसी ड्रेस कंपटीशन हो रहा है। हजारों भिक्षुओं की कतार में दर्जन भर से ज्यादा बच्चे शामिल थे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण, राम-सीता, भगवान शंकर की ड्रेस पहन रखी थी। तीन से आठ साल की उम्र के इन बच्चों ने पौष पूर्णिमा पर खासी कमाई कर ली।


सीता की ड्रेस में बैठी छह साल की रश्मि के हाथ में चॉकोबार आइस्क्रीम थी, जो अक्सर वह कार से पिकनिक मनाने के लिए संगम आने वाले बच्चों के हाथों में देखा करती थी। उसका चेहरा खुशी से चमक रहा था। रश्मि को भिक्षा के तौर पर एक घंटे में दो सौ रुपए मिले। पौष पूर्णिमा पर रश्मि और अंजुल की तरह भिक्षुओं की कतार में बैठे तमाम बच्चों को एक दिन के लिए पिकनिक मनाने का मौका मिला।
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