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एक तिहाई लोगों ने तोड़ा महीने भर कल्पवास का संकल्प

Mon, 18 Feb 2013 11:53 AM IST
इलाहाबाद/अरविंद सिंह
इलाहाबाद/अरविंद सिंह Updated Mon, 18 Feb 2013 11:53 AM IST
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people started to leave kalpvas before its completion
मौसम ने महाकुंभ में पहुंचे कल्पवासियों के संकल्प की कड़ी परीक्षा ली। भारी बारिश और उसके कारण बढ़ी सर्दी ने कल्पवासियों के लिए इतनी मुसीबतें खड़ी कर दीं कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र छोड़ना पड़ा।
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महीने भर गंगा के किनारे व्रत का संकल्प बीच में ही टूट गया लेकिन इतनी कठिनाई के बाद भी दो तिहाई श्रद्धालु कुंभ क्षेत्र में टिके हैं। कई श्रद्धालुओं के तंबू गिर गए, कंबल, रजाई गीले हो गए लेकिन उसके बाद भी पूरी रात कांपते, कलपते पड़े रहे। बारिश और तंबू गिर जाने के कारण श्रद्धालुओं को भोजन तक न मिला लेकिन तमाम कल्पवासियों ने उसकी परवाह नहीं की। गीले कंबल में लिपटे बैठे रहे और मौसम ठीक होने का इंतजार करते रहे।
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शनिवार को भारी बारिश के बाद रात में मेला क्षेत्र में अफरातफरी मची रही। तंबुओं में पानी घुस जाने और बड़े पैमाने पर टेंट टूट जाने के कारण साधु संत तथा तीर्थ पुरोहित एक दूसरे को मेला क्षेत्र छोड़ देने की सलाह देते दिखे। रात में प्रशासन की तरफ से सौ बसें मेला क्षेत्र में लगा दी गईं और लोगों से अपील की गई कि बसों से सुरक्षित स्टेशन तक जा सकते हैं।
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लगातार बारिश देख शहर और आसपास के जिलों मसलन प्रतापगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर, वाराणसी, भदोही के कई श्रद्धालुओं ने घर से साधन मंगाया और सामान समेट निकल गए लेकिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु अब भी गंगा-यमुना के किनारे टिके हैं। चारों तरफ कीचड़, गंदगी, अव्यवस्था के बाद भी आस्था नहीं डिगी। रविवार को धूप दिखने पर कल्पवासियों ने गीले कपड़े, कंबल सुखाए और कोयले का प्रबंध कर अंगीठी जलाई।


बिखरे तंबू में की पूजा
जौनपुर के मानपुर निवासी सेवकराम पांडेय, जंघई निवासी देवकुमार शुक्ल, गायत्री देवी, भदोही के बद्रीनाथ वर्मा समेत कई कल्पवासी परिवार समेत मेला क्षेत्र में टिके हैं। पूरी रात कांपते रहे लेकिन दिन में धूप दिखी तो सारे कष्ट भूल पूजा की तैयारी में जुट गए। लकड़ी गीली हो गई थी तो कहीं से कोयला लाए और अंगीठी तैयार कर ली। दोपहर बाद तमाम व्यंजन बना बिखरे तंबू में ही पूजा की और कुछ लोगों को खिलाया।

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