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महाकुंभ में मीठी गोलियों की ओर ही भागे मरीज
महाकुंभ नगर/अंकुर त्रिपाठी
Updated Wed, 27 Feb 2013 11:12 AM IST
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एलोपैथी हो होम्योपैथी, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी। अलग बीमारियों के इलाज में हर विधा का अपना महत्व है मगर महाकुंभ मेले में स्नानार्थियों और पर्यटकों का भरोसा मीठी गोलियों यानी होम्योपैथी चिकित्सा में ज्यादा नजर आया। इस तथ्य की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के ही आंकडे़ कर रहे हैं।
एलोपैथी चिकित्सा के लिए बने सेंट्रल हॉस्पिटल और 14 जोनल हॉस्पिटल की तुलना में होम्योपैथी चिकित्सालयों में कहीं ज्यादा मरीज पहुंचे। मेले में आयुर्वेद चिकित्सालयों में भी एलोपैथ के सामान्य मरीज पहुंचे। ये तथ्य हैरान नहीं करते पर ध्यान जरूर खींचते हैं क्योंकि एलोपैथ का महाकुंभ में लंबा चौड़ा बजट और बड़ा तामझाम है।
शासन का जोर एलोपैथ अस्पतालों में रहा। इन अस्पतालों में एंबुलेंस मौजूद थीं पर इतके बावजूद मरीज कम संसाधनों वाले आयुर्वेद और होम्योपैथ चिकित्सालयों में कहीं ज्यादा पहुंचते रहे।
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महाकुंभ की शुरुआत से मेले में एलोपैथ चिकित्सा के अस्पतालों पर ज्यादा ध्यान दिया गया। तमाम चिकित्सा सुविधाओं वाले 100 बेड का सेंट्रल हॉस्पिटल और 14 जोनल हॉस्पिटल तैयार किए गए। स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव, महानिदेशक का भी ध्यान इन्हीं अस्पतालों पर रहा।
एलोपैथी अस्पतालों के लगातार दौरे और निरीक्षण होते रहे। इतने बड़े मेले में आपदा की स्थिति में बड़ी संख्या में मरीजों को संभालने के लिए यह जरूरी भी था। मगर अब पता चल रहा है कि साजो-सामान और सुविधाएं तो सेंट्रल तथा जोनल हॉस्पिटलों में ज्यादा रहीं मगर रोगी अधिक पहुंचे होम्योपैथ और आयुर्वेद चिकित्सालयों में। आंकड़े यही बता रहे हैं। यह सच है कि तीनों चिकित्सा पद्धतियों की एक-दूसरे से तुलना नहीं है। सबकी अपनी विशेषता है।
आयुर्वेद के महाकुंभ में 11 चिकित्सालय बने हैं। चिकित्सा प्रभारी आयुर्वेद डॉ.अवधेश मिश्र ने बताया कि साधु-संतों, बुजुर्गों, ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने आयुर्वेद की दवाओं पर भरोसा किया। ज्यादातर रोगियों को पेट, जोड़ों के दर्द की शिकायत रही। नोडल अफसर होम्योपैथ डॉ.वीडी सिंघल ने बताया कि उनके 13 चिकित्सालयों में पुराने रोगों मसलन दमा, गठिया, लकवा के रोगी आए। होम्योपैथ की मोबाइल यूनिट से भी 4100 लोगों ने दवाएं लीं। एलोपैथ के लिए चिकित्सा व्यवस्था प्रभारी महाकुंभ मेजर डॉ.बीपी सिंह ने बताया कि लगभग चार लाख मरीजों के चेकअप और दवाएं देने के अलावा कुंभ मेले के दौरान अस्पतालों में 45 सौ रोगी भर्ती भी हुए।
कहां कितने मरीज
होम्योपैथं चार लाख 51 हजार
एलोपैथं तीन लाख 96 हजार
आयुर्वेदं तीन लाख 40 हजार
(संख्या 26 फरवरी तक की)
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एलोपैथी चिकित्सा के लिए बने सेंट्रल हॉस्पिटल और 14 जोनल हॉस्पिटल की तुलना में होम्योपैथी चिकित्सालयों में कहीं ज्यादा मरीज पहुंचे। मेले में आयुर्वेद चिकित्सालयों में भी एलोपैथ के सामान्य मरीज पहुंचे। ये तथ्य हैरान नहीं करते पर ध्यान जरूर खींचते हैं क्योंकि एलोपैथ का महाकुंभ में लंबा चौड़ा बजट और बड़ा तामझाम है।
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शासन का जोर एलोपैथ अस्पतालों में रहा। इन अस्पतालों में एंबुलेंस मौजूद थीं पर इतके बावजूद मरीज कम संसाधनों वाले आयुर्वेद और होम्योपैथ चिकित्सालयों में कहीं ज्यादा पहुंचते रहे।
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महाकुंभ की शुरुआत से मेले में एलोपैथ चिकित्सा के अस्पतालों पर ज्यादा ध्यान दिया गया। तमाम चिकित्सा सुविधाओं वाले 100 बेड का सेंट्रल हॉस्पिटल और 14 जोनल हॉस्पिटल तैयार किए गए। स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख सचिव, महानिदेशक का भी ध्यान इन्हीं अस्पतालों पर रहा।
एलोपैथी अस्पतालों के लगातार दौरे और निरीक्षण होते रहे। इतने बड़े मेले में आपदा की स्थिति में बड़ी संख्या में मरीजों को संभालने के लिए यह जरूरी भी था। मगर अब पता चल रहा है कि साजो-सामान और सुविधाएं तो सेंट्रल तथा जोनल हॉस्पिटलों में ज्यादा रहीं मगर रोगी अधिक पहुंचे होम्योपैथ और आयुर्वेद चिकित्सालयों में। आंकड़े यही बता रहे हैं। यह सच है कि तीनों चिकित्सा पद्धतियों की एक-दूसरे से तुलना नहीं है। सबकी अपनी विशेषता है।
आयुर्वेद के महाकुंभ में 11 चिकित्सालय बने हैं। चिकित्सा प्रभारी आयुर्वेद डॉ.अवधेश मिश्र ने बताया कि साधु-संतों, बुजुर्गों, ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने आयुर्वेद की दवाओं पर भरोसा किया। ज्यादातर रोगियों को पेट, जोड़ों के दर्द की शिकायत रही। नोडल अफसर होम्योपैथ डॉ.वीडी सिंघल ने बताया कि उनके 13 चिकित्सालयों में पुराने रोगों मसलन दमा, गठिया, लकवा के रोगी आए। होम्योपैथ की मोबाइल यूनिट से भी 4100 लोगों ने दवाएं लीं। एलोपैथ के लिए चिकित्सा व्यवस्था प्रभारी महाकुंभ मेजर डॉ.बीपी सिंह ने बताया कि लगभग चार लाख मरीजों के चेकअप और दवाएं देने के अलावा कुंभ मेले के दौरान अस्पतालों में 45 सौ रोगी भर्ती भी हुए।
कहां कितने मरीज
होम्योपैथं चार लाख 51 हजार
एलोपैथं तीन लाख 96 हजार
आयुर्वेदं तीन लाख 40 हजार
(संख्या 26 फरवरी तक की)