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संगम पर आस्था का समुद्र, 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
महाकुंभ नगर/ब्यूरो
Updated Sun, 10 Feb 2013 08:28 PM IST
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महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान पर जुटी भीड़ के सामने अद्भुत, असीम, अलौकिक, अतुलनीय जैसे सारे विशेषण छोटे पड़ गए। रविवार को सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से लोग 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुंचे। कुंभ क्षेत्र में सलोरी से लेकर अरैल तक जिधर भी, जहां तक निगाह गई, ‘जन सैलाब’ दिखा।
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संतों, महंतों ने लगाई डुबकी
दुनिया भर से जुटे श्रद्धालुओं के साथ दूसरे शाही स्नान पर विभिन्न अखाड़ों के नागाओं, महामंडलेश्वरों, महंतों, श्रीमहंतों ने भी डुबकी लगाई। शंकराचार्य स्वरूपानंद, शंकराचार्य वासुदेवानंद, निश्चलानंद, नरेंद्रानंद, जयेंद्र सरस्वती, अधोक्षजानंद, अवधेशानंद, स्वामी चिदानंद, स्वामी रामदेव, आसाराम बापू, देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा, महेश्वरानंद, दाती महाराज समेत बड़ी संख्या में संतों, महंतों ने डुबकी लगाई और सर्वमंगल के लिए आशीष मांगा।
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कुंभनगर में कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहां लोग सही से खड़े हो सकें। शनिवार रात से ही रुके लोग डुबकी लगाकर वापस होते रहे, लेकिन आने वालों की संख्या इतनी अधिक थी कि भीड़ किसी भी पल कम नहीं दिखी। ज्यादातर श्रद्धालुओं को साधन नहीं मिला। मौनी अमावस्या पर डुबकी लगाने के साथ चेहरे पर संतोष दिखा।
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147 वर्षों बाद बना था दुर्लभ ग्रहीय संयोग
147 वर्षों बाद बने दुर्लभ ग्रहीय संयोग और विशिष्ट योग में रविवार को मौनी अमावस्या पर शाही स्नान श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया। इससे पहले जनवरी 1865 में प्रयाग में ही अर्धकुंभ के दौरान ऐसा ही संयोग बना था।