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नवरात्र के इन दिनों में धन लाभ और कर्ज मुक्ति पाएं
राजरानी शर्मा/ज्योतिषशास्त्र
Updated Sat, 05 Apr 2014 02:37 PM IST
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नवरात्र की नौ तिथियों में सप्तमी और अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। क्योंकि इन दो दिनों में कालरात्री और महागौरी की पूजा होती है।
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ये दोनों देवियां ही शास्त्रों में तंत्र मंत्र की सिद्घि देने वाली कही गयी हैं। इनकी प्रसन्नता से ही देवी सिद्घिदात्री भक्तों की साधना और मनोकामना पूरी करती हैं। इसलिए अगर आपकी भी आर्थिक समस्याएं हैं तो इन दो दिनों में धन दायक और कर्ज मुक्ति प्रदायक मंत्रों की साधना करें।
धन वृद्घि के लिए मंत्र
कुबेर! तवं धनाधीश, गृहे ते कमला स्थिता, ता देवी प्रशयाशु, त्वं मद गृहे ते नमः।
नवरात्र में सप्तमी अथवा अष्टमी तिथि से नियमित 21 दिनों तक नौ माला इस मंत्र का जप करें।
जिस दिन जप पूरा हो जाए उस दिन गाय के घी, दूर्वा और फूल से 108 बार आहुतियां दें। यह सिद्घ शाबर मंत्र है माना जाता है कि इससे धन की बाधा दूर होती है।
ऋण मुक्ति के लिए
आं ह्रीं क्रौं श्रीं श्रियै नमः। ममालक्ष्मी नाशय, नाशय। मामऋणौतीर्ण कुरु कुरु, संपदं वर्धय वर्धय, स्वाहा। शाबर तंत्र में बताया गया है कि नियमित 43 दिनों तक 228 बार इस मंत्र का जप करें। फिर 44 वें दिन इस मंत्र का 196 बार जप करके। इसके बाद नियमित 10 बार इस मंत्र का जप करें तो धन लाभ बढ़ने के साथ ही ऋण से भी मुक्ति मिलती है।
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