{"_id":"6d5e00fe-69e2-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"naga-saints-do-seventeen-different-make-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"आश्चर्यजनक: 17 तरह के श्रृंगार करते हैं नागा साधू","category":{"title":"Astrology Archives","title_hn":"ज्योतिष आर्काइव","slug":"astrology-archives"}}
आश्चर्यजनक: 17 तरह के श्रृंगार करते हैं नागा साधू
विजय जैन/संगम (इलाहाबाद)
Updated Tue, 29 Jan 2013 12:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रृंगार की बात जब भी ली जाए तो सभी का ध्यान बरबस ही महिलाओं की ओर खींच जाता है। क्या आप जानते हैं कि नागा साधु महिलाओं से भी कहीं अधिक श्रृंगार करते हैं। बात हैरानीजनक सही, किंतु सत्य है। महिलाएं तो सोलह श्रृंगार ही करती हैं, नागा साधू 17 श्रृंगार करते हैं।
महाकुम्भ के पहले शाही स्नान के दौरान नागा साधुओं के ये श्रृंगार सामने भी आए है। जूना अखाड़े से जुड़े नागा संत श्रवण ने बातचीत के दौरान माना कि हम 17 श्रृंगार करते हैं। अखाड़ों में नागा साधु अलग-अलग तरह के होते हैं। कुछ नरम दिल तो कुछ अक्खड़ स्वभाव के होते हैं। कुछ नागा संतों के तो रूप-रंग इतने डरावने हैं कि उनके पास जाने से ही डर लगता है।
ऐसे होते हैं 17 श्रृंगार
बातचीत के दौरान नागा संत ने कहा कि शाही स्नान से पहले नागा साधु पूरी तरह सज-धज कर तैयार होते हैं और फिर अपने ईष्ट की प्रार्थना करते हैं। नागाओं के सत्रह श्रृंगार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों में लोहे या फिर चांदी का कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू या कमंडल, गुथी हुई जटाएं और तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, बदन में विभूति का लेप और बाहों पर रूद्राक्ष की माला 17 श्रृंगार में शामिल होते हैं।
विज्ञापन
नागा संत बताते हैं कि लोग नित्य क्रिया करने के बाद खुद को शुद्घ करने के लिए गंगा स्नान करते हैं, लेकिन नागा संन्यासी शुद्घीकरण के बाद ही शाही स्नान के लिए निकलते हैं। महाकुम्भ पहुंचे नागा सन्यासियों की एक खासियत यह भी है कि इनका मन बच्चों के समान निर्मल होता है। ये अपने अखाड़ों में हमेशा धमा-चौकड़ी मचाते रहते हैं। इनका मठ इनकी अठखेलियों से गूंजता रहता है।
अखाड़ों की बात करें तो महानिर्वाणी, जूना और निरंजनी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा साधुओं की तादाद है। महाकुम्भ में लाखों की संख्या में मौजूद नागा संन्यासियों के बीच एक बाल नागा अतुल गिरी श्रद्घालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनकी सुरक्षा की कमान जटाधारी नागाओं के ही हाथ में है। आम आदमी तो उनकी तरफ फटकने की हिम्मत भी नहीं कर सकता।
विज्ञापन
महाकुम्भ के पहले शाही स्नान के दौरान नागा साधुओं के ये श्रृंगार सामने भी आए है। जूना अखाड़े से जुड़े नागा संत श्रवण ने बातचीत के दौरान माना कि हम 17 श्रृंगार करते हैं। अखाड़ों में नागा साधु अलग-अलग तरह के होते हैं। कुछ नरम दिल तो कुछ अक्खड़ स्वभाव के होते हैं। कुछ नागा संतों के तो रूप-रंग इतने डरावने हैं कि उनके पास जाने से ही डर लगता है।
विज्ञापन
ऐसे होते हैं 17 श्रृंगार
बातचीत के दौरान नागा संत ने कहा कि शाही स्नान से पहले नागा साधु पूरी तरह सज-धज कर तैयार होते हैं और फिर अपने ईष्ट की प्रार्थना करते हैं। नागाओं के सत्रह श्रृंगार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों में लोहे या फिर चांदी का कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू या कमंडल, गुथी हुई जटाएं और तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, बदन में विभूति का लेप और बाहों पर रूद्राक्ष की माला 17 श्रृंगार में शामिल होते हैं।
विज्ञापन
नागा संत बताते हैं कि लोग नित्य क्रिया करने के बाद खुद को शुद्घ करने के लिए गंगा स्नान करते हैं, लेकिन नागा संन्यासी शुद्घीकरण के बाद ही शाही स्नान के लिए निकलते हैं। महाकुम्भ पहुंचे नागा सन्यासियों की एक खासियत यह भी है कि इनका मन बच्चों के समान निर्मल होता है। ये अपने अखाड़ों में हमेशा धमा-चौकड़ी मचाते रहते हैं। इनका मठ इनकी अठखेलियों से गूंजता रहता है।
अखाड़ों की बात करें तो महानिर्वाणी, जूना और निरंजनी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा साधुओं की तादाद है। महाकुम्भ में लाखों की संख्या में मौजूद नागा संन्यासियों के बीच एक बाल नागा अतुल गिरी श्रद्घालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनकी सुरक्षा की कमान जटाधारी नागाओं के ही हाथ में है। आम आदमी तो उनकी तरफ फटकने की हिम्मत भी नहीं कर सकता।