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मुस्लिम बुद्धिजीवी बोले, गंगा को गंदा करना गुनाह

Tue, 26 Feb 2013 10:47 AM IST
महाकुंभ नगर/अनिल सिद्धार्थ
महाकुंभ नगर/अनिल सिद्धार्थ Updated Tue, 26 Feb 2013 10:47 AM IST
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muslim intellectuals spoke the ganaga muddy is offense
संगम की रेती सोमवार को एक और बड़े संकल्प की साक्षी बनी। महाकुंभ पर्व की पूर्णता पर सिर्फ सनातनधर्मियों ही नहीं बल्कि मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों सहित अन्य वर्गों से जुड़े लोगों ने भी गंगाजल से वजू करके गंगा को बचाने, उसे निर्मल रखने का संकल्प लिया। मजहब की दीवारें गिराकर सभी एक मकसद को साथ आए।
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शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ की मौजूदगी में गंगाजल से ही वजू करके मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने फजिर की नमाज अदा की और गंगा को निर्मल बनाने का संकल्प लिया। एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के डॉ.मोहम्मद कलीम और मुस्लिम मजलिस के प्रदेश अध्यक्ष यूसुफ हबीब, अलखैर ट्रस्ट के अध्यक्ष रुहउल्ला, हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट फरमान नकवी आदि ने निर्मल गंगा के अभियान में तमाम लोगों के साथ जुटने की शपथ ली।
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मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा, नादियों को पाक रखना तो दीनी फरायज है। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने भी कहा था, पानी को गंदा करना गुनाह है। निर्मल गंगा का संकल्प लेने वालों में प्रो. शफाक अहमद, कारोबारी कौसर नसीम, एडवोकेट मुहम्मद रिजवान, वरिष्ठ अधिकारी मुहम्मद उबैद आदि भी शामिल थे। शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने कहा, पानी को मजहबों में बांटना उचित नहीं। निर्मल गंगा को सभी का साथ होना सुखद है।
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वहीं गंगा एक्शन परिवार के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती की मौजूदगी में भी मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों ने निर्मल गंगा का संकल्प लिया।

मशहूर शायर नजीब इलाहाबादी ने संकल्प को शब्द दिए, ‘गंगा है पाकीजगी की निशानी लिए हुए, यमुना है जिंदगी की रवानी लिए हुए, जितनी मिठास सुबह की पहली किरन में है, संगम गुलाब बनके दिलों के चमन में है।’ इसी तरह अंजुमने फरोगे हिन्दुस्तान के एम गुलरेज, जौरेज हैदर, मिर्जा जकी अहमद, शकील खान, मजहर अब्बास, रजा मेहंदी, तनवीर खान आदि ने कहा, अब निर्मल गंगा हमारी जिंदगी का मकसद है और फर्ज भी।
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