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निरंजनी के महामंडलेश्वर बने महेशानंद
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2013 10:33 AM IST
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पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की ओर से मंगलवार को संत स्वामी महेशानंद गिरि को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। परमानंद गिरि के परमधाम परिवार से जुड़े और महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि के शिष्य स्वामी महेशानंद गिरि को ‘चादरविधि’ के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महामंडलेश्वर बनाया गया।
काली रोड स्थित हरिधाम सनातन सेवा ट्रस्ट के शिविर में पुरोहितों के स्वास्ति वाचन से श्रीशुद्धि और पट्टाभिषेक के बाद आसन पर बिठाकर अखाड़े के रमता पंचों की ओर से उन्हें चादर ओढ़ाई गई। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर निरंजनपीठाधीश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरि सहित अखाड़े के सचिवों, श्रीमहंतों और अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने उन्हें चादर ओढ़ाकर समर्थन दिया। ‘चादरविधि’ के बाद अखाड़े की छावनी में उन्होंने आराध्य भगवान कार्तिकेय के विग्रह का पूजन अर्चन करने के बाद ‘पुकार’ में भेंट चढ़ाई।
कार्यक्रम में अखाड़े के रमता पंचों के अतिरिक्त महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि, स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, मां आनंदमयी, श्रीमहंत रवींद्र पुरी, महंत नरेंद्र गिरि, महंत रामानंद पुरी, महंत हरगोविंद पुरी, महंत विलकेश्वर गिरि, महंत प्रेमगिरि, महंत केशवपुरी, कोठारी आशीष गिरि, महंत आनंद गिरि, महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर दाती महराज, जूना के महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी सहित बड़ी संख्या में अखाड़े के साधु, श्रद्धालु मौजूद थे। पट्टाभिषेक के समापन पर भंडारा में सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
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निरंजनी की संख्या पहुंची 76
स्वामी महेशानंद गिरि के साथ ही निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वरों की संख्या 76 पहुंच गई। इससे पहले प्रयाग महाकुंभ के दौरान स्वामी निर्भयानंद और स्वामी चिन्मयानंद को महामंडलेश्वर बनाया गया था।
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काली रोड स्थित हरिधाम सनातन सेवा ट्रस्ट के शिविर में पुरोहितों के स्वास्ति वाचन से श्रीशुद्धि और पट्टाभिषेक के बाद आसन पर बिठाकर अखाड़े के रमता पंचों की ओर से उन्हें चादर ओढ़ाई गई। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर निरंजनपीठाधीश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरि सहित अखाड़े के सचिवों, श्रीमहंतों और अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने उन्हें चादर ओढ़ाकर समर्थन दिया। ‘चादरविधि’ के बाद अखाड़े की छावनी में उन्होंने आराध्य भगवान कार्तिकेय के विग्रह का पूजन अर्चन करने के बाद ‘पुकार’ में भेंट चढ़ाई।
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कार्यक्रम में अखाड़े के रमता पंचों के अतिरिक्त महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि, स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, मां आनंदमयी, श्रीमहंत रवींद्र पुरी, महंत नरेंद्र गिरि, महंत रामानंद पुरी, महंत हरगोविंद पुरी, महंत विलकेश्वर गिरि, महंत प्रेमगिरि, महंत केशवपुरी, कोठारी आशीष गिरि, महंत आनंद गिरि, महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर दाती महराज, जूना के महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी सहित बड़ी संख्या में अखाड़े के साधु, श्रद्धालु मौजूद थे। पट्टाभिषेक के समापन पर भंडारा में सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
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निरंजनी की संख्या पहुंची 76
स्वामी महेशानंद गिरि के साथ ही निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वरों की संख्या 76 पहुंच गई। इससे पहले प्रयाग महाकुंभ के दौरान स्वामी निर्भयानंद और स्वामी चिन्मयानंद को महामंडलेश्वर बनाया गया था।