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यहां हर साल नौ दिनों के लिए द्रौपदी और पाण्डव आते हैं

Sat, 14 Dec 2013 08:30 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 14 Dec 2013 08:30 AM IST
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mahabharat pandav atma

महाभारत युद्ध के बाद पाण्डवों ने कई वर्षों तक राज किया इसके बाद सारा राज अपने पौत्र परीक्षित को सौंपकर द्रौपदी सहित स्वर्ग की यात्रा पर निकल पड़े। लेकिन सिर्फ युधिष्ठिर ही शरीर सहित स्वर्ग जाने में सफल हुए। द्रौपदी सहित अन्य चारों भाईयों की रास्ते में ही मृत्यु हो गई।

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लेकिन आज भी पृथ्वी पर एक स्थान ऐसा है जहां हर साल दशहरे के दिन पांडव द्रौपदी के साथ आते हैं। यह स्थान यमुना और टौंस घाटी के बीच पहाड़ियों में बसा गांव है जौनसार बावर। यहां के जनजातियों का मानना है कि नवरात्र के नौ दिन तक पाण्डव इनके बीच होते हैं।
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नवरात्र के पहले दिन युवा सज धजकर एक समारोह में पहुंचते हैं। यहां पाण्डवों की आत्मा को बुलाया जाता है। अपनी पसंद के अनुसार पाण्डव की आत्मा युवाओं शरीर में प्रवेश कर जाती हैं।
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द्रौपदी किसी महिला के शरीर में प्रवेश करती है। इसके बाद नौ रातों तक जिनके शरीर में पाण्डवों की आत्मा होती है वह विशेष नृत्य करते हैं। इस नृत्य को पाण्डव नृत्य कहा जाता है।


यह नृत्य पूरे सिर्फ नवरात्र में होता है। गांव के लोग पाण्डवों को अपने घर बुलाकर इनका अतिथि सत्कार करते हैं। पण्डव गांव वालों को सुखमय जीवन का आशीर्वाद देते हैं। दशहरे के दिन पाण्डव कई मीलों की यात्रा करके नदी में स्नान करने आते हैं इसके बाद वापस स्वर्ग लौट जाते हैं।

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