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12 साल से मचान पर गुजार रहे जिंदगी
महाकुंभ नगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jan 2013 11:12 AM IST
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संगम की रेती में चल रहे महाकुंभ में आए रामकृष्ण दास महात्यागी बाबा पिछले 12 वर्षों से मचान पर बैठ अटल साधना के साथ बैठे हैं। प्रयाग महाकुंभ 2011 में शंकराचार्य, अखाड़ों के प्रतिनिधियों, संत-महात्मा सभी की अनुमति से मचान पर साधना में बैठे महात्यागी बाबा इस प्रक्रिया को आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक साधन मानते हैं। साधना की इस प्रक्रिया को वह क्रोध पर काबू करने का आसान तरीका मानते हैं।
मचान पर बैठकर महात्यागी बाबा हनुमान जी की भक्ति के साथ दीन-दुखियों की सेवा में लगे हैं। महाकुंभ 2012 में महात्यागी बाबा गंगा को प्रदूषण से बचाने और भूखों को भोजन कराने का संकल्प लेकर साधना में जुटे हैं। मचान पर साधना के आरंभ 2001 कुंभ के बावत महात्यागी बाबा कहते हैं कि उस दौरान भी बड़ी संख्या में संत-महात्मा गंगा को बचाने के लिए आंदोलन में जुटे थे, इस दौरान उन्होंने प्रयाग के कोतवाल हनुमान जी की प्रेरणा से गंगा को बचाने का संकल्प लिया।
इसी के साथ भूमि का त्याग कर मचान पर ही साधना करने का निर्णय लिया। तब से लगातार वह मचान पर बैठकर साधना कर रहे हैं। संगम से लौटने के बाद वह दिल्ली स्थित अपने आश्रम श्री राम हनुमान वाटिका मंदिर में मचान पर साधना करते रहे।
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महात्यागी बाबा ने बताया कि मचान पर बैठ संकल्प करने से पहले भी वह अपने गुरु की प्रेरणा से गुरु पूर्णिमा से शारदीय नवरात्र तक मचान पर बैठकर पूजन करते रहे हैं। अपने आश्रम में आने वालों को पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने का संकल्प दिलाते हैं। मचान पर ही पूजन-हवन के साथ वहीं बैठकर वह भक्तों से संवाद करते हैं। वह भोर में गंगा स्नान के बाद दिन भर हवन पूजन और भूखों को भोजन, चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवा रहे हैं।
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मचान पर बैठकर महात्यागी बाबा हनुमान जी की भक्ति के साथ दीन-दुखियों की सेवा में लगे हैं। महाकुंभ 2012 में महात्यागी बाबा गंगा को प्रदूषण से बचाने और भूखों को भोजन कराने का संकल्प लेकर साधना में जुटे हैं। मचान पर साधना के आरंभ 2001 कुंभ के बावत महात्यागी बाबा कहते हैं कि उस दौरान भी बड़ी संख्या में संत-महात्मा गंगा को बचाने के लिए आंदोलन में जुटे थे, इस दौरान उन्होंने प्रयाग के कोतवाल हनुमान जी की प्रेरणा से गंगा को बचाने का संकल्प लिया।
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इसी के साथ भूमि का त्याग कर मचान पर ही साधना करने का निर्णय लिया। तब से लगातार वह मचान पर बैठकर साधना कर रहे हैं। संगम से लौटने के बाद वह दिल्ली स्थित अपने आश्रम श्री राम हनुमान वाटिका मंदिर में मचान पर साधना करते रहे।
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महात्यागी बाबा ने बताया कि मचान पर बैठ संकल्प करने से पहले भी वह अपने गुरु की प्रेरणा से गुरु पूर्णिमा से शारदीय नवरात्र तक मचान पर बैठकर पूजन करते रहे हैं। अपने आश्रम में आने वालों को पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करने का संकल्प दिलाते हैं। मचान पर ही पूजन-हवन के साथ वहीं बैठकर वह भक्तों से संवाद करते हैं। वह भोर में गंगा स्नान के बाद दिन भर हवन पूजन और भूखों को भोजन, चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवा रहे हैं।